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Awaam ki awaaz

गोदी मीडिया आपको नहीं बताएगा कि ग्रेटर नोएडा में हिन्दुओं की मदद से मस्ज़िद का निर्माण हो रहा है

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निसार सिद्दीक़ी

समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर आने वाली सांप्रदायिक टिप्पणियों से बेपरवाह ग्रेटर नोएडा में हिन्दू और मुस्लिम समाज ने सांप्रदायिक सद्धभाव की मिसाल क़ायम की है। “ग्रेटर नोएडा के रिठौड़ी गांव में मस्जिद बन रही है। मस्जिद बनाने के लिए हिन्दू समाज के लोगों ने पैसे और ज़मीन दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। नोएडा अथॉरिटी ने हिन्दू समाज की पहल पर मस्जिद की ज़मीन दी। जब मस्जिद की बुनियाद पड़ी तो एक तरफ कुरआन की आयतें पढ़ी गईं तो दूसरी तरफ रामायण का पाठ कराया गया।”

यह न्यूज़ आपको टीवी चैनलों की ब्रेकिंग और बड़ी बहसों में नहीं मिलेगी। यह न्यूज़ चंद अख़बारों की क्षेत्रीय ख़बर के पन्नों में छपेगी और वहीं खत्म हो जाएगा। अब सोचिए कि कहीं हिन्दू-मुस्लिम दंगा हो जाए, कहीं मॉब लिंचिंग हो जाए, कहीं दो समुदायों के बीच विवाद हो जाए, कहीं मंदिर-मस्जिद का ही झगड़ा हो जाए। तो टीवी पर आप 2-2 घंटों की बहस देखेंगे, स्पेशल कवरेज़ किए जाएंगे, एक समुदाय को दूसरे समुदाय का दुश्मन बताया जाएगा। आग ऐसी भड़काई जाएगी की मानो हिन्दू-मुस्लिम इस देश में साथ रह नहीं सकते।

ग्रेटर नोएडा की ही ख़बर ले लीजिए। नफ़रत फैलाने वाली न्यूज़ अख़लाक़ हत्याकांड की आई थी। महीनों टीवी बहस हुई थी। विधानसभा से लेकर संसद तक में बहस हुई। ऐसी-ऐसी बातें सामने आएं, जो ये बताती थी कि अब मुस्लिम लोग हिन्दू मोहल्लों में नहीं रह सकते। लोग डरने लगे।

सोचिए नफरत वाली ख़बर पर इतना बवाल और मोहब्बत वाली ख़बर कोई चर्चा तक नहीं। अरे इतना तो कर देते कि विधानसभा और संसद से गांववालों को धन्यवाद ज्ञापन दे देते। टीवी स्टूडियो में गांववालों को बुलाकर प्रोग्राम करते, जिससे पूरे देश को संदेश जाता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा। क्योंकि राजनीति में नफ़रत, डर, हिंसा और बवाल का धंधा होता है। इस धंधे में मीडिया भी शामिल है क्योंकि पैसा और पावर तो यहीं से आता है।

(लेखक जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनीवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर हैं)

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