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शख्सियतः क्या आप डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और मौलाना मोहम्मद अली के योगदान से वाकिफ हैं ?

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सैय्यद फैजान जैदी

14 दिसम्बर 1912 को तुर्की में खैंची गई मौलाना मुहम्मद अली जौहर और डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी की ये तस्वीर 5 जनवरी 1913 को ‘कामरेड’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुई थी।

शुरुआती राजनीति में डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी पर मौलाना मुहम्मद अली का बहुत प्रभाव था यही कारण है उन्होने 1912-13 मे हुए बलकान युद्ध मे ख़िलाफ़त उस्मानिया के समर्थन मे रेड क्रिसेंट के बैनर तले मेडिकल टीम की नुमाईंदगी दिसम्बर 1912 में की थी जिसमे उनके साथ मौलाना मोहम्मद अली जौहर सहित दीगर कई लोग शामिल थे।

चूंकी मलेट्री मदद करने पर अंग्रेज़ो ने पाबंदी लगा दी थी, इस लिए डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी ने 25 डॉकटर की टीम बनाई और मर्द नर्स की एक टीम बनाई जिसमे उनकी मदद करने के लिए काफ़ी तादाद मे तालिब ए इल्म ने हिससा लिया। इसमे कुछ नौजवान काफ़ी रईस घरानो से तालुक रखते थे और इनमे अधिकतर इंगलैड मे ज़ेर ए तालीम थे। इस काम के लिए डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी को “तमग़ा ए उस्मानिया” से नवाज़ा गया था जो उस समय वहां का एक बड़ा अवार्ड था जो फ़ौजी कारनामो के लिए उस्मानी सल्तनत द्वारा दिया जाता था।

ये मिशन 7 माह तक चला और 10 जुलाई 1913 की शाम को दिल्ली स्टेशन पर 30000 से अधिक लोगो की भीड़ डॉ अंसारी, जौहर और उनके साथियों के स्वागत के लिए खड़ी थी, इन लोगों का जगह-जगह बहुत सम्मान हुआ।

रेड क्रिसेंट के बैनर तले डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी के ज़रिये किए गए काम के लिए उन्हे ख़िलाफ़त के ज़वाल बाद भी याद किया गया और उनके कारनामो का ज़िक्र ख़ुद मुस्तफ़ा कमाल पाशा ने इक़बाल शैदाई को इंटरवयु देते वक़्त किया था और उसने हिन्दुस्तान का शुक्र भी अदा किया था।

ध्यान रहे हिन्दुस्तान मे रेड क्रॉस सोसाईटी 1920 मे वजुद मे आई जबके डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी ने उस्मानीया सल्तनत के समर्थन मे 1912 मे ही रेड क्रिसेंट सोसाईटी को अपनी सेवाएं देनी शुरी कर दी थी। इसी साल भारत के दौरे पर आये तुर्की के सदर रजब तय्यिब एरदोगान ने जामिया मीलिया इस्लामीया के द्वारा मिल़े डॉक्टरेट की उपाधि पर शुक्रीया अदा करते हुए डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी और मौलाना मुहम्मद अली जौहर के कारनामो को याद किया था।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)