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असमः नागरिक रजिस्टर का पहला ड्राफ़्ट जारी, BJP द्वारा सांप्रदायिक रंग दिए जाने की आशंका से आक्रोश।

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पूर्वोत्तर के राज्य असम राज्य में नागरिक रजिस्टर का पहला ड्राफ़्ट जारी हो गया है।जिसमें  कुल तीन करोड़ 29 लाख आवेदनों में से सिर्फ एक करोड़ 90 लाख लोगों को ही क़ानूनी रूप से भारत का नागरिक माना गया है।

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) शैलेश ने इस मसौदे को हाल ही में सार्वजनिक किया और बताया कि बाकी के नामों पर अलग अलग स्तरों पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मसौदे का एक मात्र हिस्सा है. इसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं, इनकी जांच हो चुकी है. उन्होंने बताया कि बाकी के नामों की कई स्तरों पर जांच चल रही है. जैसे ही जांच पूरी हो जायेगी हमलोग दूसरा मसौदा भी ले आयेंगे।

हिन्दी समाचार वेबसाईट दी वायर हिन्दी के मुताबिक एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने कहा कि जिन लोगों का नाम पहली सूची में शामिल नहीं  हुआ है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘नामों की जांच एक लंबी प्रक्रिया है।  इसलिए ऐसी संभावना है कि पहले मसौदे में कई ऐसे नाम छूट सकते हैं जो एक ही परिवार से आते हों।

उन्होंने कहा कि चिंता की जरूरत नहीं है क्योंकि शेष दस्तावेजों का सत्यापन चल रहा है। अगले मसौदे के लिये संभावित समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला सुप्रिम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक अप्रैल में इसकी अगली सुनवाई के दौरान किया जायेगा। गौरतलब है कि सुप्रिम कोर्ट की निगरानी में इन दस्तावेजों को तैयार किया जा रहा है।

शैलेश हजेले ने कहा कि पूरी प्रक्रिया साल 2018 के अंदर पूरी कर ली जायेगी. आवेदन की प्रक्रिया मई, 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें पूरे असम के 68.27 लाख परिवारों से 6.5 करोड़ दस्तावेज मिले थे। उन्होंने कहा, ‘आखिरी मसौदा आते ही शिकायतों पर कार्रवाई की जायेगी, क्योंकि बचे हुए नाम आखिरी मसौदे में शामिल किये जाने की संभावना है।

बता दें कि असम एक ऐसा राज्य है जिसके पास एनआरसी है। इसे सबसे पहले साल 1951 में तैयार किया गया था. 20वीं सदी से ही इस राज्य में बांग्लादेश से लोगों का प्रवाह रहा है। असम राज्य में बांग्लादेश और म्यांमार से पलायन करके आने वाले लोगों का मुद्दा बहुत पुराना है, जिससे निपटने के लिए सरकारें बहुत से आयामों पर विचार करती रही हैं। सरकार चाहती है कि जो लोग ग़ैर क़ानूनी रूप से असम में रह रहे हैं, उन्हों वापस उनके देश भेजा जाये।

आंकड़े की मानें तो महीनों की कोशिश के बाद सिर्फ एक बांग्लेदशी नागरिक को उसके देश भेजा जा सका। इस वक्त राज्य में और केन्द्र में भाजपा की सरकारें हैं। कुछ लोगों का मानना है कि भाजपा इस मामले को भी सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान कह चुके है, कि वे बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आने वाले हिंदू प्रवासियों को नागरिकता देंगे। इस बात से लोगों में चिंता और आक्रोश है।