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सपा विधायक आशू मलिक ने बताया मदरसों का महत्तव, कहा ‘जामिया हो या AMU अतीत में मदरसे ही रहे हैं’

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नई दिल्ली – समाजवादी पार्टी के विधायक (एमएलसी) आशू मलिक ने मदरसे पर उठे विवाद को लेकर अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने कहा कि “मदरसा” एक अरबी शब्द है। जिसका वास्तविक अर्थ है शिक्षा का स्थान! मदरसे का अंग्रेज़ी में अनुवाद “School” और हिंदी में “पाठशाला” है। 12वीं शताब्दी के अंत तक दमिश्क, बग़दाद, मोसूल व अधिकांश अन्य मुस्लिम शहरों में मदरसे फलफूल रहे थे।

आशू मलिक ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि इन मदरसो में इस्लामी अध्यात्मवाद व क़ानून के अलावा, अरबी व्याकरण व साहित्य, गणित, तर्कशास्त्र और प्राकृतिक विज्ञान भी मदरसों में पढाए जाते थे। अध्यापन निःशुल्क था व भोजन, आवास उपलब्ध कराने के अलावा चिकित्सकीय देखभाल भी की जाती थी। शिक्षण सामान्यतः आंगन में होता था और इसमें मुख्यतः पाठ्य-पुस्तकों व शिक्षक के उपदेशों को कंठस्थ करना होता था।

सपा विधायक ने बताया कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र जारी करता था, जिसमें उसके शब्दों को दोहराने की अनुमति होती थी। शहज़ादे व अमीर परिवार भवनों के निर्माण और विद्यार्थियों व शिक्षकों को वृत्ति देने के लिए दान में धन देते थे। इन मदरसों के पढने वालों ने इस दुनियाँ को नई नई खोजें भी दीं जिसका आज हम और आप लाभ उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मदरसा शब्द को सिर्फ और सिर्फ इस्लामी शिक्षा और बाकी शिक्षाओं से वंचित रखने की वकालत करने वाले लोंगो ने जिस प्रकार इसका अतिक्रमण किया और इस शब्द को सिर्फ और सिर्फ इस्लामी शिक्षा देने वाले संस्थान के रूप में स्थापित किया यकीनन ये उनके ज्ञान को बताता है कि वे कितना सीमित और संकुचित था वरना आज अलीगढ मुस्लिम विश्वविघालय हो या जामिया मिल्लिया इस्लामिया जो कि शिक्षा के स्थान कि वजह से मदरसें ही हैं, इसी नाम से याद किये जाते और आज भी मदरसों की वही छवि बरकरार होती जो कि 12 वीं शताब्दी में थी।