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व्यंगः खिचड़ी से मेरा पुराना नाता है जब में प्रचारक था, तो खिचड़ी ही खाकर गुजारा करता था।

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सलीम अख़्तर सिद्दीकी

सवाल : सर, बेरोजगारी बढ़ रही है, नौकरियां जा रही हैं। सरकार क्या कर रही है?

जवाब : देखिए ताजमहल हमारी संस्कृति नहीं भी है, तो भी वह भारतीयों के खून पसीने से बना है। हमें उसकी रक्षा करनी है। हमारे मुख्यमंत्री वहां अभी झाड़ू लगा आए हैं। सब ठीक हो जाएगा।

सवाल : शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। जितने शिक्षक होने चाहिए उतने नहीं हैं। ठेके पर शिक्षक रखे जा रहे हैं।

जवाब : हमने पाकिस्तान को चेतावनी दे दी है। उसकी हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम जल्दी ही एक के बदले दस सिर लाने वाले हैं।

सवाल : देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। एनपीए लगातार बढ़ रहा है। सरकार क्या कर रही है?

जवाब : हर आदमी को वंदेमातरम कहना होगा, राष्ट्रगान गाना होगा। जो ऐसा नहीं करेगा, वह पाकिस्तान चला जाए।

सवाल : आपने बीफ एक्सपोर्ट बंद करने की बात की थी। आपकी सरकार में वह और ज्यादा क्यों बढ़ गया है?

जवाब : हमें पहले भारत को कांग्रेस मुक्त बनाना है। देश की जनता ने मूड बना लिया है, वह हर जगह से कांग्रेस को खदेड़ रही है।

सवाल : आपकी सरकार के दौरान कश्मीर में आतंकवाद बढ़ गया है?

जवाब : गाय हमारी धरोहर है, जो इसको मारेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। हमारे गोरक्षक इस काम में जी जान से लगे हुए हैं।

सवाल : लेकिन आपकी पार्टी तो कह रही है कि उत्तर पूर्व के राज्यों और गोवा में गाय के मीट की कमी नहीं होने दी जाएगी?

जवाब : चुनाव जीतना जरूरी है। जहां जो जुमला चल सकता है, हम चला रहे हैं और चलाएंगे। हमारी यही रणनीति है।

सवाल : कालाधन वापस क्यों नहीं आया?

जवाब : खिचड़ी हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। इसे खाने से आदमी स्वस्थ रहता है। मेरा तो खिचड़ी से पुराना नाता है। जब में प्रचारक था, तो खिचड़ी ही खाकर गुजारा करता था।

सवाल : स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं। आॅक्सीजन के बगैर सैकड़ों बच्चे मर गए। गुजरात से भी बच्चों के मरने की खबर आई है?

जवाब : स्वच्छता अभियान को पूरे देश ने सराहा है। हमने अच्छे अच्छों के हाथ में झाड़ू पकड़ा दी है। मुझे झाड़ू पर गर्व है।

सवाल : भुखमरी के मामले में हम 55 से 100वें नंबर चले गए हैं?

जवाब : गरीबी से मेरा पुराना नाता रहा है। मैंने गरीबी देखी है। मैं चाहता हूं कि देश का हर आदमी गरीबी को करीब से महसूस करे। हमारे वित्त मंत्री इसके लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ये व्यंग उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है और ये उनके निजी विचार हैं)