Breaking News
Home / देश / पढ़ें – सुप्रिम कोर्ट के न्यायधीश द्वारा लिखी गईं चिट्ठी की दस मुख्य बातें

पढ़ें – सुप्रिम कोर्ट के न्यायधीश द्वारा लिखी गईं चिट्ठी की दस मुख्य बातें

नई दिल्ली – देश की आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रिम कोर्ट के जजों ने मीडिया बुलाकर प्रेस कांफ्रेंस की है। जजो ने चीफ जस्टिस को सात पन्नों की एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी की दस मुख्य बातें हम अपने पाठकों के लिये नीचे लिख रहे हैं।

चिट्ठी की दस मुख्य बातें इस तरह हैं

  1. पिछले दिनों उच्चतम न्यायल दफ्तर से लिए प्रशासनिक फैसले हमारे लिए चिंता का कारण रहे हैं।
  2. इन फैसलों ने हमारी पूरी न्याय प्रक्रिया और न्याय प्रदान करने के तंत्र पर प्रभाव डाला है।
  3. इसका प्रभाव हाईकोर्ट्स की आजादी पर पड़ा है।
  4. कलकत्ता, मद्रास और बाम्बे हाईकोर्ट के गठन के बाद से कुछ परंपराएं और तरीके न्यायिक प्रशासन में स्थापित किए जाते रहे हैं. ये परंपराएं इस कोर्ट में एक सदी के कामकाज में स्थापित की गईं और प्रयोग में लाई गईं।
  5. यही परंपराएं यह बताती रही हैं कि मुख्य न्यायधीश किस तरह मुकदमों का बंटवारा करते हैं और किस तरह ये प्रक्रिया अदालतों के लिए आवश्यक भी हैं.
  6. मुख्य न्यायधीश सौ साल में स्थापित उस परंपरा से अलग जा रहे हैं, जिसके तहत महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सामूहिक तौर पर लिए जाते रहे हैं.
  7. मुख्य न्यायधीश मुकदमों के बंटवारे में नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
  8. वे महत्वपूर्ण मामले, जो उच्चतम न्यायलय की अखंडता को प्रभावित करते हैं, मुख्य न्यायधीश उन्हें बिना किसी वाजिब वजह से उन बेंचों को सौंप देते हैं, जो मुख्य न्यायधीश की पसंद की हैं. इससे संस्थान की छवि बिगड़ी है. हम ज़्यादा केसों का हवाला नहीं दे रहे हैं.
  9. चिट्ठी में कुछ फैसलों और मुकदमों को एक खंडपीठ से लेकर दूसरी खंडपीठ को सौंपने को लेकर सवाल उठाये गए हैं
  10. इस चिट्ठी में कोलकाता हाईकोर्ट के जज कर्णन पर दिए गए फैसले पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया कि इस पर फिर से विचार करने की जरूरत थी.

Check Also

राजस्थानः एक और बंगाली मजदूर साकिर अली की मौत, जिस्म पर मिले तेजाब से जलने के निशान

Share this on WhatsAppनई दिल्ली –  राजस्थान में पश्चिम बंगाल के एक और मजदूर की …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *