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जानिये क्या है इस्लामिक बैंक ? जो ब्याज लिये बगैर ही देता है कर्ज

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नई दिल्ली –  हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने इस्लामी बैंकिंग प्रणाली को भारत में लागू करने से इनकार कर  दिया है। इस इनकार के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक ने तर्क दिया है कि सभी नागरिकों को फाईनेंशियल और बैंकिंग सेवाओं का मिलना जरूरी है, इसीलिये आरबीआई ने इस्लामिक बैंक को भारत में खोलने की इजाजत नही दी है।

बताते चलें कि इसी साल अप्रैल में पीएम मोदी की यूनाईटेड अरब अमीरात के दौरे के दोरान भारत के एक्सिस बैंक ने इस्लामिक डेवलेपमेंट बैंक (आईडीबी) के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किये थे, इसमें तय हुआ था कि सऊदी अरब का बैंक आईडीबी भारत में भी अपनी शाख खोलेगा, यह शाखा गुजरात में खुलनी थी, जिसे खोलने से आरबीआई ने मना कर दिया है। जिस वक्त ये बात चली थी उस वक्त ऐसी भी खबरें आईं थीं कि इसके लिये सौ मिलियन डॉलर का एग्रीमेंट हुआ है।

क्या है इस्लामिक बैंक

इस्लाम में ब्याज लेना और देना दोनों की ही मनाही है, इसलिये इस्लामी बैंक ब्याज पर न तो कर्ज देत है और न ही ब्याज वसूलता है। इतना ही नहीं इस बैंक के द्वारा जो कर्ज दिया जाता है अगर उसकी भुगतान समय पर कर दिया जाता है तो बैंक की तरफ उपहार भी दिया जाता है। इस्लामिक बैंक की शुरुआत मलेशिया से हुई थी, लेकिन अब दुनिया के 50 इस्लामी देशों में यह बैंकिंग प्रणाली लागू है। इसकी करीब तीन सो के आस पास संस्थाऐं हैं।

इस्लामिक बैंक एक ट्र्स्ट के तौर पर काम करत है, इस बैंक में बचत खाता (सेविंग अकाऊंट) पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता, हालांकि जब खाते में पडे पैसे से बैंक को कोई लाभ होता है तो बैंक उपहार स्वरूप कुछ न कुछ अपने कंज्यूमर को भेंट करता है। इतना ही नहीं अगर कोई बैंक से कर्ज लेता है तो उसे उसका ब्याज नहीं देना पड़ता सिर्फ मूल रकम ही वापस करनी पड़ती है।

भारत मे एसा नहीं है यहां बैंक से कर्ज लेने पर मोटा ब्याज लिया जाता है, और अगर कर्ज समय पर न चुकाया जाये तो ब्याज में और अधिक बढ़ोतरी कर दी जाती है, इतना ही नहीं कई बार  तो बैंक द्वारा कर्ज वसूली के लिये कुर्की तक की जाती है। चूंकि इस्लाम में ब्याज को हराम करार दिया गया है इसलिये इस्लामिक बैंक ब्याज नहीं वसूलता, अगर भारत में यह प्रणाली लागू कर दी जाती तो भारत ऐसा पहला देश होता जो इस्लामिक देश तो नही है लेकिन फिर भी इस्लामिक बैंकिंग यहां शुरु हो गई है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने एसा होने नहीं दिया और इस्लामिक बैंक की शाखा को भारत मे खोलने से मना कर दिया।