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चार साल में सबसे कम GDP ग्रोथ, रवीश बोले, चॉकलेट खाने के पैसे भले न हो, मगर दस रुपये का नया नोट चाकलेटी रंग का होगा।

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रवीश कुमार

जीडीपी ग्रोथ चार साल में सबसे कम है। एनडीए सरकार के दौर में यह सबसे कम है। 2016-17 में 7.1 था। 2017-18 में 6.5 प्रतिशत रहा है। 2013-14 में 6.4 प्रतिशत से मात्र .1 प्रतिशत ज़्यादा। दोनों मुख्य कारण वही हैं जो सरकार नहीं मानती है। सरकार ने नोटबंदी के दूरगामी प्रभाव को अच्छा बताया था मगर इसके दूरगामी प्रभाव से अर्थव्यवस्था को लँगड़ी लग गई है। दूसरा कारण जीएसटी भी है। नोटबंदी सनक भरा फैसला था और इसे लेकर लोग आज तक उल्लू बने हुए हैं। उनकी मर्ज़ी।

CSO, central statistical office ने शुक्रवार को यह अनुमान जारी किया है। कृषि में भी विकास दर आधी से अधिक गिरने वाली है। 2016-17 में 4.9 प्रतिशत से 2017-18 में 2.1 प्रतिशत रहेगी। आँकड़े बताते हैं कि गाँवों में भयंकर संकट है। अंग्रेज़ी में massive rural stress लिखा है। आज तक सरकार नोटबंदी का फायदा आपके सामने नहीं रख पाई। डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात करती है पर वो तो बिना नोटबंदी के भी हो सकता था। कुछ तो खेल है जो सरकार नहीं बता पा रही या फिर भोली जनता को समझ नहीं आ रहा है।

भारत में प्रति व्यक्ति आय में 8.3 प्रतिशत की दर से ही वृद्धि होने का अनुमान है। 2016-17 में 9.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने साढ़े तीन साल बर्बाद हो जाने के बाद राज्य सभा में माना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। देवेंद्र शर्मा कब से ये बात कह रहे हैं।

सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। अब वह रिजर्व बैंक ले इस साल अतिरिक्त पैसा मांग रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बैंकों को 250 अरब डॉलर नुक़सान होने का अंदेशा है। नोटबंदी जैसी मूर्खतापूर्ण फैसले की वजह से हो रहा है यह मत पूछिएगा। अब इतिहास ही नोटबंदी के फैसले को मूर्खतापूर्ण साबित करेगा। इसका नुक़सान करोड़ों लोगों ने रोजगार गँवा कर और कमाई घटाकर उठाया है। चुनावी जीत नोटबंदी की जीत नहीं है।

स्टेट बैंक आफ इंडिया ने संकेत दिया है कि न्यूनतम बैलेंस पर लगने वाली जुर्माना राशि पर विचार करेगा। क्या इसे मुख्य धारा की मीडिया ने उठाया था या सोशल माडिया ने ? बताया गया है बैंक इस फैसले की आलोचना से प्रभावित हुआ है ! चॉकलेट खाने के पासे भले न हो, मगर दस रुपये का नया नोट चाकलेटी रंग का होगा। नौटंकी कम नहीं होनी चाहिए।

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है)