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जनता की जेब पर पड़ रहा सरकारी डाकाः 31 रुपए के पेट्रोल का जनता दे रही 79 रुपए

नई दिल्ली लगभग साढ़े तीन साल पहले की बात है तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीम 103.86 डॉलर (करीब 6300 रुपये) प्रति बैरल थी और उस टाइम पेट्रोल 70 रुपए लीटर के आस पास बिक रहा था तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। तब देश की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी थी। उस टाइम भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पेट्रोल की कीमत के खिलाफ देशभर में आंदोलन किया था।

इसके उलट आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 54.16 डॉलर (3470 रुपये) प्रति बैरल है। यानी तीन साल पहले की तुलना में करीब आधी। लेकिन आज पेट्रोल लगभग 80 रुपए लीटर मिल रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय तेल कंपनियों को एक लीटर कच्चा तेल 21.50 रुपये का पड़ता है और इसे टैक्स आदि जोड़कर इस्तेमाल लायक बनाने में करीब 9.34 रुपये खर्च होते हैं। यानी एक लीटर कच्चा तेल इस खर्च के बाद कंपनी को करीब 31 रुपये का पड़ता है। यानी हर लीटर पेट्रोल पर आम जनता कम से कम 45 से 50 रुपए अधिक चुका रही है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को पेट्रोल और डीजल के दाम की दैनिक आधार पर समीक्षा करने से रोकने के लिए सरकार के हस्तक्षेप से इनकार किया है। मोदी सरकार का कहना है कि भारत को आधारभूत ढांचे के विकास के लिए पैसा चाहिए इसलिए वो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने का लाभ ले रही है। मोदी सरकार ने तेल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया है जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने के बावजूद भारत में कीमत कम नहीं हो रही है।

पिछले एक महीने में पेट्रोल की कीमत में सात रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। मोदी सरकार ने 16 जून से पेट्रोल की कीमतों की दैनिक समीक्षा नीति लागू की है। उससे पहले तक पेट्रोल की कीमतों की पाक्षिक समीझा होती थी।

गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.39 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 73.13 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 79.5 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 72.97 लीटर रही। पेट्रोल की ये कीमत अगस्त 2014 के बाद सर्वाधिक है। भारत में पेट्रोल तब भी महँगा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले कुछ सालों में काफी कम हुई हैं। लेकिन भारतीय ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने का लाभ नहीं मिल रहा है।

सौ. नेशनल दस्तक

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