Breaking News
Home / विशेष रिपोर्ट / इब्राहीम गार्दीः मराठों का वह जांबाज सेनापति जो पीठ दिखाकर नहीं भागा बल्कि मुक़ाबला करते हुए शहीद हुआ

इब्राहीम गार्दीः मराठों का वह जांबाज सेनापति जो पीठ दिखाकर नहीं भागा बल्कि मुक़ाबला करते हुए शहीद हुआ

नज़ीर मलिक

पेशवाई इतिहास में बाजीराव प्रथम ही एक मात्र पेशवा थे जो वीर धीर और साहसी थे, मगर वे शिवाजी की तरह सम्मानित नहीं हो सके। हालांकि उनकी विजय यात्रा शिवाजी से कहीं बड़ी थी। मगर उनकी नस्ली श्रेष्ठता का दंभ ही उनकी महानता की राह की सबसे बडी बाधा था। उनके जो समर्थक उन्हें हिंदू हृदय सम्राट मानते हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि उनमें ही नहीं सभी 9 पेशवाओं में नस्ली दंभ था। वे कोंकड़स्थ ब्राहमन के अलावा किसी को अपने बराबर नहीं मानते थे। यहां तक आम ब्रहमन को भी नहीं।

उन्होंने पेशवा जैसे फारसी शब्द को अपने सम्मान का सूचक बनाया। उन्होंने पादशाही जैसे फारसी शब्द को मान्यता दी। उन्होंने दकन के मुस्लिम लड़ाकों को अपनी फौज में कुछ सम्मान तो दिया लेकिन दक्षिण के दलित और पिछड़े लडाकों खास कर महार और गावली समाज को वह सम्मान कभी नहीं दिया जिसके वो हकदार थे। यही करण है कि बाजीराव प्रथम की कि 1740 में मौत के बाद से ही पेशवाई की दीवार टूटने लगी और आखिरी पेशवा बाजीराव द्धितीय 1801 तक केवल साठ सालों में यह व्यवस्था इतिहास के कूड़ेदान में चली गई।

सत्ता और नस्ली श्रेष्ठता के फर्जी दंभ में चूर मराठों की पानीपत की तीसरी जंग में क्या हालत हुई किसी से छिपा नहीं है। पेशवा बालाजी राव के समय 14 जनवरी  1761 की उस जंग में मराठा फौज के मुस्लिम सरदार इब्राहीम गार्दी की शहादत ही एक मा़त्र गर्व करने लायक अध्याय है। बाकी बड़े सरदार तो जान बचा कर भाग निकले थे। मगर जाते वक्त भी नर्तकियों को ले जाना नही भूले।

दूसरी तरफ युद्ध में लड़ते वक्त घायल होने के बाद पकड़े गये योद्धा इब्राहीम गार्दी का जब हाथ काटा गया तो उसने अल्लाह का नाम लिया और कलमा ए शहादत पढ़ा। गर जब उसका गला काटने के हुक्म दिया गया तो उसने अपनी सरजमीन की शान में सलाम पेश कर धरती का माथा चूमते हुए उसका सजदा किया, फिर बड़े फख्र से शहादत दिया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Check Also

डॉ. मनमोहन सिंह से एक से बढ़कर एक तीखा सवाल करने वाले पत्रकार अभी तक PM मोदी से एक ढ़ंग का सवाल तक नहीं कर पाये हैं

Share this on WhatsAppराकेश कायस्थ यह समय भारतीय समाज के स्मृति लोप का है। यादाश्त …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *