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नज़रियाः योगी जी हज कमैटी के बजाय ताजमहल को भगवा रंग से पोत दें तब ज्यादा लोग देखने आयेंगे

नदीम अख्तर

दो रोज़ पहले यूपी सरकार ने लखनऊ में विधानसभा रोड स्थित हज कमैटी के दफ्तर की दीवारों से भगवा रंग से पोत दिया। विवाद बढ़ा तो सारा दोष ठेकेदार पर मढ़कर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया। वैसे हमें भगवा रंग से कोई दिक़्क़त नही, क्या होगी और क्यों होगी ?

तो फिर कबूल है भगवा

योगी सरकार को चाहिये कि जितने बेघर मुसलमान हैं सरकार उन्हे भगवा रंग के घर बनवा कर दे, जो बेरोज़गार मुसलमान हैं उन्हे रोज़गार दे, नियुक्ति पत्र भगवा रंगा हो, भले ड्रैस कोड भगवा हो, भगवा दफ़्तरों मे भगवा कुर्सी पर बिठाइये, तनख़्वाह मे नोट भी भगवा दीजिए, जिन मुस्लिम बस्तियों मे स्कूल/कॉलेज नही हैं वहां स्कूल/कॉलेज बनवाइये भगवा रंग के ही बनवा दीजिए।

सरकार को चाहिये मुस्लिम मरीज़ों को बेहतर इलाज दीजिए भले अस्पताल भगवा रंग का हो, भले ही बेड भी भगवा हो चाहे दवाई भी भगवा रंग की खिलवाइये, आप पुलिस की वर्दी, डंडे, बंदूक़, गोली, थाना सब भगवा कर दीजिए बस पुलिस मुसलमानों के साथ भेदभाव न करे, आप भगवा को तरक़्क़ी का रंग बनाइये, अमन और भाईचारे का रंग बनाइये, मुसलमान इसका इस्तक़बाल करेंगे।

लेकिन योगी जी को चाहिये कि वे भगवा को बदले और ज़बरदस्ती का रंग न बनायें, ‘हज कमैटी’ को भगवा रंग मे रंग के आपको क्या फ़ायदा होने वाला है, ‘ताजमहल’ को भगवा रंग मे रंग दीजिए शायद ज़्यादा लोग देखने आयेंगे। वैसे एक बात समझ नहीं आती कि पेड़ों के पत्ते सब्जी का रंग तो हरा होता है सरकार इस चुनौती को स्वीकार करे और उनको भगवा रंग से पुतवा दे, अगर सरकार ने ऐसा किया तो योगी सरकार का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्लड रिकार्ड में जरूर दर्ज हो जायेगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

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