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मॉब लिचिंग पर बनी शार्ट फिल्म ‘भीड़’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, सोचने पर मजबूर कर देगी ये फिल्म

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नई दिल्ली – पिछले तीन साल में मॉब लिंचिंग (यानी भीड़ द्वारा हत्या) की घटनाओं का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। मई 2014 में पुणे में इंजीनियर मोहसिन शेख की हिन्दुवादियों ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी। मोहसिन की हत्या के पीछे का कारण सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान ही थी।

उसके बाद तो लगातार मॉब लिंचिंग की घटनाएँ होती रहीं, 2015 में उत्तर प्रदेश के नोएडा से सटे दादरी के बिसहेड़ा गांव में गाय के नाम पर वायू सेना के जवान सरताज अहमद के पिता अखलाक अहमद की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या उन्हीं के गांव के लोगों द्वारा की गई थी। अखलाक पर उन्होंने इलजाम लगाया था कि उनके फ्रिज में गौमांस था।

उसके बाद लगातार इस तरह की हत्या होती रहीं गाय के नाम पर होने वाली हत्याओं की संख्या 28 है और ये हत्याएं पिछले दो साल में हुई हैं। इसी साल ईद के मौके पर हरियाणा के रहने वाले 18 वर्षीय मासूम हाफिज जुनैद की ट्रेन में भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के पीछे भी उसकी धार्मिक पहचान ही उसकी मौत की कारण बनी थी।

इन्हीं सब मुद्दों को उठाते हुए शार्टफिल्म प्रोड्यूसर खालिद नायक और शॉर्ट फिल्म निर्माता व लेखक इमरान हैदर ने ‘भीड़’ फिल्म बनाई है। यह शार्ट फिल्म लगभग बीस मिनट की है। प्रोड्यूसर खालिद नायक ने बताया कि जल्द ही इस फिल्म की स्क्रीनिंग की जायेगी। उन्होंने बीते गुरुवार को ‘भीड़’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया है।

देखें ट्रेलर

खालिद नायक ने बताया कि इस फिल्म के जरिये उन सारे मुद्दों को उठाने की कोशिश की गई है जिसमें मॉब लिंचिंग द्वारा हत्याएं हुई हैं। ये हत्याएं गाय के नाम पर, बच्चा चोरी के नाम पर, और धार्मिक पहचान के नाम पर की गई हैं। भीड़ का फोकस इन्हीं मुद्दों पर है।

भीड़ अराजकता और धार्मिक कट्टरता की एक मार्मिक कहानी है यह फिल्म भारत में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर गंभीरता से दर्शाती है। यह फिल्म भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पहचान पर आलोचना करती है, जहां एक विशेष नाम रखने, एक विशेष आस्था वाले, क्या खाना है क्या नही खाना है जैसे फरमान सुनाने वालों की भी आलोचना करती है।