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क्या कांग्रेस में इतनी भी कुव्वत नहीं कि वह BJP राज में हो रही मुसलमानों की हत्याओं के खिलाफ इंसाफ की आवाज़ उठाये ?

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मोहम्मद कासिम मेवाती

अगर हक़ीक़त को खंगालने का प्रयास हो  तो हिंदुस्तानी मुसलमानों ने जमीअत उलेमा हिन्द के बैनर तले देश के लिए कांग्रेस से ज्यादा कुर्बानी देकर तख़्त और ताज कांग्रेस के सुपुर्द किया शर्त सिर्फ एक कि तमाम अकलियत! आजादी के साथ जिनमे धर्म और विचार शामिल था रहेंगी! लेकिन कांग्रेस पार्टी का बदला बदला स्वभाव बड़े सवाल खड़े करता है।

क्या तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, नारायण दत्त तिवारी और बूटा सिंह द्वारा बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने की साज़िश का पर्दाफाश तो हुआ, लेकिन हिंदुस्तान का सच्चा मुसलमान उस पर भी खमोश सिर्फ इस लिए रहा कि देश पहले है। आपने अपनी हुकूमत के आने के बाद क्या गुजरात के उन हजारो लोगो के साथ इंसाफ किया जिन्हें उन्ही के घरो में 2002 में मारा गया, काटा गया, जलाया गया, आप तो इस पूरे चुनाव में जकिया जाफरी जो आपकी ही पार्टी के मरहूम सांसद एहसान जाफरी की बेवा है उनसे मिलना तक मुनासिब नही समझा।

आखिर क्यों ?

राहुल की कांग्रेस अगर नरम हिंदुत्व की राह को अख्तयार करती है तो इसमें फिर कोई पीवी नरसिंह राव का पुनर्जन्म होने से इनकार नही किया जा सकता, मोदी को मन से नही हराना चाहते हो, इस लिए मंच से उनको कभी जोर से नही कह सके कि आप के हाथों में लाल रंग हिंदुस्तानी मुसलमानों का है। आप कभी मंच से नही कह सके कि इशरत जहां का इनकाउंटर अल्पसंख्यक समुदाय में दहशत फैलाने के लिए किया गया।

किसी मंच से आपने नही कहा कि हां अहमद पटेल हिंदुस्तानी मुसलमान हैं वो मुख्यमंत्री क्यों नही हो सकते इतना ही पूछ लेते की मोहतरमा महबूबा को किस के इशारे पर कायम किया, नही पूछा आप मन्दिर मन्दिर घूमे लेकिन मजबूर गुजराती मुसलमान के जख्मो पर कोई मरहम  लगाना तो दूर उनके मन की बात तक नही की, राहुल ग़ांधी की कांग्रेस को दिशा कौन देगा ? ये आने वाला समय ही बतायेगा।

(लेखक मेव पंचायत हरियाणा राजस्थान के प्रवक्ता हैं, ये उनके निजी विचार हैं)