Home पड़ताल नज़रियाः जो मोदी अपने गुरू आडवाणी का सम्मान नहीं करते वे भला...

नज़रियाः जो मोदी अपने गुरू आडवाणी का सम्मान नहीं करते वे भला किसी का क्या सम्मान करेंगे ?

SHARE

मसीहुज़्ज़मा अंसारी

कुछ दिनों पहले त्रिपुरा में BJP मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह की एक video बहुत वाइरल हुई जिसमें मोदी जी मंच पर पहुँचते हैं और सभी वरिष्ठ नेता उनके सम्मान में खड़े हो जाते हैं। मोदी जी बारी-बारी सबसे मिलते हैं मगर जैसे ही BJP के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संस्थापक मेंबर आडवाणी जी के सामने पहुँचते हैं, उन्हें अनदेखा कर के आगे को बढ़ जाते हैं।

आडवाणी जी हाथ जोड़े खड़े रहते हैं कि शायद अब मोदी जी मेरी तरफ़ देख लें लेकिन उनका ये सोचना व्यर्थ चला जाता है। मुझे आडवाणी जी से वैचारिक मतभेद हो सकता है मगर किसी पार्टी की बुनियाद रखने वाले वृद्ध व अनुभवी व्यक्ति की यूँ अवहेलना मुझे अजीब सी लगी। पार्टी के अंदर क्या चल रहा है मुझे नहीं पता मगर मुझे इतना पता है कि अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिए। कैमरे के सामने भी और कैमरे के पीछे भी।

मुझे याद है कि कुछ वर्षों पूर्व बनारस में एक पंडित जी मुझ से मिले जो श्रद्धा व सम्मान पर चर्चा कर रहे थे। अपनी बात में उन्होंने सम्मान का एक उदाहरण देते हुवे कहा कि भगवान राम ने एक बार अपने भाई लक्ष्मण से कहा था कि देखो रावण तुमसे बड़ा है अतः तुम्हें बड़े होने के नाते उनका आदर व सम्मान करना चाहिए।

अगर BJP, जिसकी विचारधारा और पूरी सियासत राम नाम के इर्द-गिर्द मँडराती है, उस पार्टी के बड़े और वृद्ध नेता की यूँ अनदेखी कर अपमान करना भाजपा के राम नाम की मद्धिम पड़ती वैचारिक धारा को दर्शाता है। आडवाणी जी कुछ भी हो सकते हैं मगर रावण से बुरे तो हरगिज़ नहीं हो सकते। राम जी लक्ष्मण से अगर रावण का सम्मान करने को कह सकते हैं तो BJP या RSS मोदी जी से आडवाणी जी का सम्मान करने को क्यों नहीं कह सकती है?

राम जी को आदर्श बताने वाली पार्टी व नेता नेता अगर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता का ऐसे अपमान करेंगें तो फिर यहाँ एक प्रश्न स्वाभाविक होगा कि संगठन अपने कार्यकर्ताओं के लिए कैसा आदर्श और कैसी संस्कृति जन्म दे रहा है? मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन को आदर्श बताने वाले नेता का ये व्यवहार न तो किसी मर्यादा को दर्शाता है और न ही पुरुषोत्तम होने के गुण को।

पार्टी या नेता जी शायद भूल गए कि जिस यात्रा के फलस्वरूप BJP को जनसमर्थन मिला और सत्ता सुख प्राप्त हुआ उस रथयात्रा के नायक वही आडवाणी जी हैं जिनकी अवहेलना आज उनके शिष्य कर रहे हैं। आडवाणी जी भाजपा के वर्तमान नेताओं के गुरु हैं भले ही उन्हें द्रोणाचार्य कहना उचित न हो लेकिन एक समर्पित कार्यकर्ता को चाहिए कि वो राजनीतिक गुरु को गुरुदक्षिणा में एकलव्य की तरह अँगूठा न दें मगर उनका अपमान कर उन्हें अँगूठा भी न दिखाएँ। एक राजनीतिक गुरु के लिए सम्मान ही गुरु दक्षिणा है। ये घटना ज़ाहिर करती है कि भाजपा को सत्ता के लिए राम का नाम तो याद है मगर उसी पार्टी के किसी वृद्ध को सम्मान देने के लिए राम का आदर्श भूल गयी।

(लेखक पत्रकारिता से जुड़े हैं