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कन्हैय्या का राष्ट्रपति से सवाल, ‘खुद को दलित कहने वाले राष्ट्रपति कोविंद दलित की हत्या पर चुप्पी क्यों हैं?’

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नई दिल्ली – जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैय्या कुमार ने इलाहबाद में दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या को लेकर नाराजगी जाहिर की है। कन्हैय्या ने कहा है कि एक तरफ देश के जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान की कुर्बानी दे रहे हैं, दूसरी तरफ समाज विरोधी, जातिवादी, कट्टरपंथी और सामंती लोग अपनी झूठी शान की रक्षा के लिए देश के नौजवानों की हत्या कर रहे हैं।

कन्हैय्या ने सवाल किया है कि आखिर इनको इतनी हिम्मत कहाँ से आती है? ये हिम्मत इनको सरकार में बैठे लोगों की निष्क्रियता या फिर उनके समर्थन से प्राप्त होती है। जब रोज देश के जवानों और युवाओं की जान जा रही हो और प्रधानसेवक इन सबको पूरी तरह नज़रअंदाज़ करके दुनिया घूम रहे हों, तो अपराधियों और आतंकियों में कानून का डर तो ख़त्म होगा ही।

उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि इलाहाबाद में दिलीप सरोज की निर्मम हत्या पर महामहिम राष्ट्रपति जी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं। वे हमेशा कहते हैं कि मैं भी दलित हूँ, तो फिर एक दलित की हत्या पर चुप्पी क्यों? “ढोंगी सरकार” के तो अंदाज ही निराले हैं, क्योंकि वो एक तरफ दावा कर रहे हैं कि यूपी में अपराधियों का खात्मा करेंगें; वहीं दूसरी तरफ खुद के ऊपर लगे आपराधिक मुकदमों को खत्म करके चंद्रशेखर जैसे युवाओं पर झूठा मुकदमा ठोक रहे हैं। इससे अपराधियों का मनोबल तो बढ़ना तो तय है क्योंकि कहा जाता है कि “जब सइयाँ भये कोतवाल तब डर कहे का”।

कन्हैय्या ने कहा कि सरकार और मीडिया के अंदर बैठे इन अपराधियों के समर्थकों ने समाज के अंदर जिस डर, हिंसा और नफरत का माहौल पैदा किया है, इसकी कीमत हम सबको चुकानी पड़ेगी। इसलिए अपनी बारी की प्रतीक्षा किये बिना इसके खिलाफ लड़ना जरूरी है, वर्ना आने वाली पीढ़ियों के सवालों का हमारे पास कोई जवाब नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि चंदन और अंकित की मौत पर हिन्दू-हिन्दू चीखने भी वाले चुप हैं, क्योंकि सरोज की हत्या में उनकी हिन्दू-मुसलमान की राजनीति फिट नही होती। हमें इंसान और इंसानियत को बचाना होगा, तभी देश और समाज बचेगा। नहीं तो ये नकली नेता और महज कुर्सी के यार जात, धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के नाम पर जनता को लूटकर मौज करेंगे।

कन्हैय्या ने कहा कि इस देश का किसान खेत में, जवान सीमा पर और नौजवान विश्वविद्यालय और सड़क पर अपनी जान गवाते रहेंगें। इन मरते हुए किसानों, जवानों, नौजवानों और तमाम शोषण के शिकार लोगों को बचाना जरूरी है, तभी देश बचेगा क्योंकि देश हमेशा देश के लोगों से ही बनता है।