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राणा अय्यूबः जिसने बताया कि कौम की बेटियाँ ऐसी होती हैं, और पत्रकारिता ये होती है।

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इस्लाहुद्दीन अंसारी

नाम राणा अय्यूब, काम पत्रकारिता, जानी जाती हैं अपनी किताब “गुजरात फाईल्स” के लिए, 2002 का गुजरात दंगा कोई कैसे भूल सकता है भला, इतिहास के पन्नों में ये दंगा अपनी वीभत्सा और सरकारी मशीनरी के बेज़ा इस्तेमाल के लिए हमेशा याद किया जाएगा। गुजरात में सत्ताधारी दल की के कई नेता और पुलिस के आला अधिकारियों की संलिप्तता की वजह से गुजरात दंगा हमेशा से देश विदेश में सुर्खियों में बना रहा। कथित गुजरात माडल और हिंदुत्व की प्रयोगशाला जैसे शब्दों का इस्तेमाल गुजरात दंगों के बाद ही सुर्खियों में आया था।

बहरहाल ये सब तो ऊपरी बातें थी जो सब जानते थे लेकिन कौम की एक बेटी ने गुजरात दंगों के सच से पर्दा उठाने का बीड़ा उठाया और मैथली त्यागी बनकर गुजरात में सत्ता और ब्यूरोक्रेट्स के मजबूत किले में सेंध लगाकर गूजरात दंगों के सच की परतें उधेड़ कर रख दी। राणा ने आठ महीने लगातार 6 शरीर पर छिपे छः खूफिया कैमरों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों सहित अमित शाह और नरेंद्र मोदी तक का स्टिंग किया। और गुजरात दंगों और फर्जी मुठभेड़ो का सच दुनियाँ के सामने लेकर आईं।

राणा बखूबी जानती थीं की जो वो कर रही हैं उसमें जान का खतरा है। पर कौम की इस बेटी पर कौम पर हुए ज़ुल्म और सितम का सच दुनियाँ के सामने लाने की धुन इस कदर सवार थी की वो जान की बाज़ी लगाने से भी नहीं चूकी। राणा कि इन्वेस्टिगेसन की वजह से 2010 में अमित शाह को जेल जाना पड़ा था। राणा चाहती तो इन उनके स्टिंग के टेपों बदले उन्हें मुंह माँगी मुराद मिल सकती थी। वो चाहती तो इस स्टिंग के बदले गुजरात में ब्यूरोक्रेट्स और सत्ता के धुरंधरो से डील कर सकती थी पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

राणा चाहती तो स्टिंग के टेप सार्वजनिक करके TRP की इस अंधी रेस में सबसे आगे होतीं, पर नहीं कौम की इस बहादुर बेटी का मक़सद कौम पर हुए ज़ुल्म और सितम के असली मुजरिमों को सलाखों के पीछे पहुंचाना है। ये बहादुर बेटी क्लीन चिट के पीछे के काले धब्बे को दुनियाँ को दिखाना चाहती है। जिसके लिए वो लगातार प्रयासरत है और इंशाअल्लाह एक दिन वो अपने मक़सद में कामयाब होकर रहेंगी। और दुनियाँ देखेगी की जिन्हें अपने बाजुओं की ताक़त पर बेज़ा गुमान हुआ करता था जो क़ानून और व्यवस्था को अपने उंगलियों के इशारे पर नचाते थे उन्हें देश की एक बहादुर बेटी ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

अभी कल ही राणा को उनकी किताब गुजरात फाइल्स के लिए पनामा पेपर्स रिलीज़ करने वाली एजेंसी Global Investigative Journalism Network द्वारा Global Shining Award 2017 से नवाज़ा गया है। बधाई राणा अय्यूब इस बेहतरीन कामयाबी के लिए। हमें गर्व है आप पर, हमें गर्व है आपकी इस कामयाबी पर, हमें गर्व है आपकी बाहादुरी और काबिलियत पर। यकीनन कौम और देश की बहादुर बेटियाँ ऐसी ही होती हैं।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)