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मोदी जी मुस्लिम महिलाओं को ‘इंसाफ’ दिलाने का इतना ही शौक है तो इन मुस्लिम मांओं को भी इंसाफ चाहिये?

इस्लाहुद्दीन अंसारी

साहेब अगर हमें इंसाफ़ दिलाने के लिए आप इतने ही फिक्रमंद हैं तो आईये लिये चलते हैं आपको अख़लाक़, पहलू, मिनहाज़, उमर, जूनैद, नजीब और अफराजुल जैसे दर्जनों मजलूमों की चौखटों पर जिनके घर की खुशियाँ नाइंसाफ़ी की भेंट चढ़ गईं। जब अख़लाक़ को दरिंदों की भीड़ ने बेदर्दी से कत्ल किया तब अख़लाक़ की बेटी चीख़ चीख़ कर अपने बाप के लिए इंसाफ़ मांग रही थी तब पूरी दुनियाँ ने उसकी चीख़े सुनी सिवाय एक शख़्स को छोड़कर। जब झारखंड के मिनहाज़ अंसारी की बेवा मासूम सी बच्ची को गोद में लेकर अपने पति के लिए इंसाफ़ मांग रही थी तब पूरे देश ने उस मज़लूम की आंहें सुनी सिवाय एक शख़्स को छोड़कर।

जब जुनैद की माँ रो-रो कर अपने जवान बेटे की मौत पर विलाप कर रही थी तब उस माँ के आंसूओं को देखकर सबने हमदर्दी जताई सिर्फ एक शख़्स को छोड़कर। जब पहलू की खान अंधी माँ अपने पहलू को इंसाफ़ दिलाने की लिए चीख़ कर रोई तब पूरे देश ने इस माँ का दर्द महसूस किया बस नहीं महसूस किया तो उसी शख़्स ने जो बड़ी बड़ी बातें किया करता है।

जब उमर मारा गया तब उमर के परिवार के लोगों ने भी इंसाफ़ के लिए गुहार लगाई उनकी गुहार भी पूरे देश में सुनी गई पर उस शख़्स के कान में जूं तक़ नहीं रेंगी। जब नजीब गायब हुआ तब से लेकर अब तक वो अबला माँ दिल्ली की हर चौखट पर जाकर उसे अपने आंसुओं से तर बतर कर चुकी है पर वो शख़्स हमेशा की तरह इस माँ के आंसुओं को नजरअंदाज करता रहा। रत्ती भर दया नहीं आई उसे इस माँ पर की कम से उससे मिलकर उसे तसल्ली ही देता।

फिर अफ़राजुल की बारी आई…… एक दरिंदे ने जब उसे जिंदा जलाते हुए उसकी वीडियो जारी की तब पूरा देश दहल उठा इस वीडियो को देखकर। अफराजुल की चीख़ों ने देश के सारे अमन पंसद लोगों को बेचैन कर के रख दिया। अफ़राजुल की जवान बेटियाँ अपने बाप के लिए रोती रहीं बिलखती रहीं पर वो बेदर्द इसे अनसुना कर लफ़्फाजियां करता रहा।

उस शख़्स के एक साथ एक और गिरोह भी इन सारी नाइंसाफ़ियों पर खामोश था। जिसने इन मज़लूमों के कतिलों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। जिस गिरोह ने इन मज़लूमों के क़ातिलों की लाश पर बड़ी बेशर्मी से तिरंगा डाल दिया था। जिस गिरोह ने इन हत्यारों के समर्थन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी वही गिरोह उस शख़्स की चुप्पी पर भी चुप्पी ओढ़े अपनी बेशर्मी को अंजाम देता रहा।

आज वही शख़्स और वही गिरोह मुस्लिम बहनों को इंसाफ़ दिलाने के नाम पर मुसलमानों का हिमायती होने का नाटक़ कर रहा है। टीवी से लेकर चुनावी मंचों और संसद के भीतर तक़ शोर शराबा किया जा रहा है। लोगों को चिल्ला चिल्ला कर बताया जा रहा है की वो लोग मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ़ दिलाने की गरज़ से ऐसा कर रहे हैं। अब ज़रा सोचिये की जो शख़्स आपके साथ हुई दर्जनों नाइंसाफ़ियों पर आपकी हिमायत या हमदर्दी में एक शब्द ना बोल पाया हो वो भला आपको इंसाफ़ दिलाने के बारे में सोंच भी कैसे सकता है?

जो गिरोह अफराजुल के कातिल के समर्थन में न्यायालय की छाती पर चढ़कर हंगामा कर चुका हो, अख़लाक़ के क़ातिल की लाश पर डालकर तिरंगे की अज़मत को तार-तार कर चुका हो वो भला आपके हिमायत में पास होने वाले किसी बिल के समर्थन में क्यों रहेगा। नजीब की अम्मी के आंसुओं पर जिस गिरोह का दिल ना पसीजा हो। मिनहाज़ के मासूम बच्चों की रूदाद से जिसे खूशी मिली हो। उमर, जुनैद और पहलू की लाशों पर जिसे शर्मिंदगी ना महसूस हुई हो। वो भला आपके हित की बात कैसे सोंच भी कैसे सकता है।

उनका मक़सद तो बस तीन तलाक़ बिल की पेचीदगी में जकड़कर आपको प्रताड़ित करने का है। वो चाहते हैं की आप इसके चंगुल में फंसकर सलाखों के पीछे चले जाएं और आपके बीवी बच्चे और परिवार के लोग दर-दर की ठोकरें खाने मजबूर हो जाएं। वो आपके परिवारों के बीच कलह का बीज बोने की कोशिशों में हैं।

इस बिल के माध्यम से आपको प्रताड़ित करने अलावा कोई दूसरा मक़सद नज़र नहीं आता उनका, हमें तीन तलाक़ मसले पर सरकार की मंशा पर शुरू से ही शक़ है और रहेगा। क्योंकि जब तीन तलाक़ लगभग पूरी दुनियाँ में प्रतिबंधित है तब हम भी यही चाहते हैं की ये कुरीति हमारे मुल्क़ में भी प्रतिबंधित हो जाए पर जब दुनियाँ के किसी देश में तलाक़ के मामले में सजा का प्राविधान नहीं है तब हमें क्यों इस सज़ा का दंश देने पर उतारू है ये सरकार। ये एक बड़ा सवाल है। सोचेंगे तो समझ आयेगी इसकी पेचीदगियां। समझेंगे तो समझ आयेगा की इंसाफ़ दिलाने के नाम पर किस क़दर नाइंसाफ़ी करने के मंसूबों की अमली जामा पहनाने की फिराक़ में हैं सरकार।

साहेब अगर हमें इंसाफ़ दिलाने के लिए इतने ही फिक्रमंद हैं तो आईये चलिये हमारे साथ लिये चलते हैं आपको उन चौखटों पर जिनके घर की खुशियाँ नाइंसाफ़ी की भेंट चढ़ गई हैं। चलिये हमारे साथ और देखिये की मुस्लिम महिलाओं को किन मसलों पर इंसाफ़ की दरकार है आपकी सरकार से।

चलिये हमारे साथ और चल कर बैठिये उन माँओं बेटियों और बीवियों के पास जिनके जवान बेटे जिनके बाप और जिनके सुहाग की छीन लिया है चंद हैवानों ने आईये हम और आप साथ चलें और चलकर उन सारी मुस्लिम महिलाओं की आंख में आंख डालकर ये कहें की आप उन्हें इंसाफ़ दिलाओगे। आईये चलते हैं नजीब की माँ के पास और चलकर कहते हैं की आप उसे उसका खोया बेटा ढूंढकर ला देंगे। और अगर नहीं तो बंद कीजिये हमें इंसाफ़ दिलाने के नाम पर लफ़्फाजियां करना, हमारी फिक्र करने की नौटंकी करना, हमारे साथ हमदर्दी का नाटक़ करना।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं ये उनके निजी विचार हैं)

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