Home पड़ताल विशेषः गरीबों के पेट पर खड़े होकर ऊंचा दिखने की सनक।

विशेषः गरीबों के पेट पर खड़े होकर ऊंचा दिखने की सनक।

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इस्लाहुद्दीन अंसारी

दो दिन पहले हमने एक पोस्ट लिखी थी कि किस तरह नगर निगम जबलपुर के अधिकारियों पर स्वच्छ भारत का भूत सवार हुआ है जिसमें स्वच्छ भारत के नाम पर खेमचे वाले और गरीब आदमी की रोजी-रोटी पर डाका डालने वाली दुस्साहसिक कार्यवाही को अंजाम दिया गया है।

स्वच्छ भारत और स्मार्ट सिटी के नाम पर अधिकारियों और नगर निगम के कर्मचारियों की पिछले तीन दिन की सारी गतिविधियों पर गौर किया जाए तो आप पाएंगे की नंबर बनने की होड़ में किस तरह से गरीबों के पेट पर पैर रखकर ऊंचा दिखने की शर्मनाक कोशिशें की गई हैं।

“कचरे वाली गाड़ी मे तुम कचरा डालो जी का स्लोगन” किस बेशर्मी से “गरीबों के पेट में तुम लात मारो जी” में बदला गया की सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएगा।

साहब अगर शहर साफ़ सुथरा करके फुर्सत मिल गई हो तो दो चार सौ रुपये की लागत लगाकर बमुश्किल अपने परिवार का पेट पालने की जद्दोजहद में कड़कड़ाती ठंड में पान का ठेला चलाने वाले उस गरीब से जाकर पूछियेगा एक बार की उसने पिछले तीन चार दिनों में आपकी स्वच्छ भारत मिशन नाम की सनक की क्या कीमत चुकाई है।

रात भूखे पेट सोने और सुबह उठते ही आपके (लुटेरे) अमले की दहशत में दुकान और खेमचा बंद करने का दर्द क्या होता है जाकर पूछियेगा उस गरीब से।

क्यों भूल जाते हैं बार बार की स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत में उस गरीब का पेट भी पलता है जो सड़क किनारे अपनी छोटी सी दूकान लगाकर अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त करने के लिए दिन बर सड़कों की धूल फांक कर अपना पेट भरता है ताकी उसके बच्चे रात में ना सो सके। क्यों भूल जाते हैं आप इस स्मार्ट सिटी में रहने वाले उस आखरी आदमी को जो पिछले दो सालों से आपकी स्वच्छ भारत मिशन में रोज आहुति दे रहा है।

महरबानी करके मानवीय पहलुओं को कचरे की टोकरी में डालकर उसकी कीमत पर शहर को साफ़ मत कीजिये। बल्कि हो सके तो उससे एक बार हाथ जोड़कर प्यार से विनती करके देखिये अगर वो खुद अपनी मर्जी से आपकी बातें मानने तैयार हो जाएगा। उसे इस तरह से आतंकित करके, डराकर, उसके सामने रोज़गार का संकट पैदा करके और उसपर चालानी चाबुक चलाकर उसे अपनी इस सनक में कभी भागीदार नहीं बना पाएंगे आप। उल्टे उस बेचारे गरीब की हाय और बददुआएं ज़रूर ले बैठेंगे जो अच्छी बात नहीं है।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)