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बिहार का लालू, जेपी का लालू नफ़रत के रथ के पहिये थामकर नफ़रती ताकतों के गाल पर करारा तमाचा मारने वाला लालू।

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इस्लाहुद्दीन अंसारी

कुछ लोग हालात से समझौता करके अरविंद केजरीवाल बन जाते हैं, कुछ लोग डर जाते हैं और डरकर, हालात से घबराकर नितीश कुमार बन जाया करते हैं और कुछ लोग ना समझौता करते हैं, ना डरते हैं और ना हार मानते हैं ऐसे ही लोग इतिहास में लालू प्रसाद यादव बनकर वक़्त के हिटलर छाती पर होरहा भूंजते रहते हैं।

जब आपके पीछे सारी सरकारी एजेंसियां लगा दी जाएं, आपको हर स्तर पर परेशान किया जाए यहाँ तक की जनता के द्वारा चुनी गई आपकी सरकार को भी पलट कर अपने चंगुल में जकड़ लिया जाए, सिर्फ़ इसलिए की आप किसी सूरत उसकी राह का रोड़ा ना बनने पाएं। उसके भेड़चाल के रास्ते में दीवार बनकर ना खड़े हो जाएं। तब ऐसे हाल में भी चट्टान बनकर तूफान का डटकर मुक़ाबला करने वाले लोग ही लालू प्रसाद यादव कहलाते हैं।

ऐसा भी नहीं है की उनके सामने विकल्पों की कमी रही होगी। ऐसा भी नहीं है नीतीश की तरह उन्हें भी चंगुल में फंसाने के प्रयास ना किए गए होंगे और ऐसा भी नहीं है की उनके सामने कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रस्ताव नही आया होगा। बहोत हद तक़ मुमकिन है की ये सारी चीजें हुई हों पर आख़िरकार वो भी तो लालू प्रसाद यादव ही है, गुदड़ी का लाल बिहार की माटी का बेटा समझौता करता भी तो कैसे करता? जिसने अपनी जिद के आगे आडवाणी के रथ के पहिये थाम दिये हों वो भला उनके शागिर्दों के सामने थमता भी तो कैसे? ठुकरा दिया उसने सारे विकल्पों को और खड़ा हो गया सीना ताने गिरोह के सामने। की जाओ कह देना अपने साहेब से की बिहार की मिट्टी में पल कर बड़े हुए इस ठेठ बिहारी बाबू की कीमत चुकाने की औकात नहीं है अभी किसी में।

जब सारे हथकंडे अपना लिए गए सारे फार्मूले फेल हो गए सारी कोशिशें नाकाम हो गई, ना एजेंसियां डरा पाई ना तोते की चोंचमारी काम आ पाई ना सत्ता का लोभ उसके हौसले डिगा पाया तब एक और बचकानी कोशिश की गई उसे सलाखों का डर दिखाया गया की शायद अब मान जाएगा लालू पर साहेब फिर भूल गए की जय प्रकाश नारायण के इस बिहारी शिष्य ने छात्र जीवन में राजनीति के ज़्यादातर अध्याय इन्हीं सलाखों के पीछे बैठकर कंठस्थ किये हैं।

वो रुकने वाला नहीं है, वो डरने वाला नहीं है और ना ही वो हालात से घबराने वाला है। उसने अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत ही बगावत से की है। जय प्रकाश नारायण के आंदोलन का एक मुख्य किरदार था वो। नफ़रत की सियासत करने वालों के आगे वो कभी नहीं झुक सकता। फिर भले ही उसे सलाखों में कैद कर लिया जाए या जंजीरों में जकड़ लिया जाए पर करेगा वही जो उसे करना है जो उसने ठाना है क्योंकि वो लालू है, बिहार का लालू, जेपी का लालू नफ़रत के रथ के पहिये थामकर नफ़रती ताकतों के गाल पर करारा तमाचा मारने वाला लालू।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)