Home कारोबार अन्तरराष्ट्रीय ग्राहकों की नई पसंद- बाकू

अन्तरराष्ट्रीय ग्राहकों की नई पसंद- बाकू

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अज़रबैजान – बाकू शॉपिंग फेस्टीवल में भारी भीड़ उमड़ रही है। मेले में खरीदारी के लिए लगता है पूरा अज़ैरबाइजान राजधानी में जमा हो गया है। जैसे जैसे 15 नवम्बर नज़दीक आ रही है, लोग अपने हिस्से की खरीदारी निपटा लेना चाहते हैं। खरीदारों में काफी मात्रा में तुर्की, जॉर्जिया और ईरान के पर्यटक भी पहुँच रहे हैं। बाकू शॉपिंग फेस्टीवल के दौरान हमने वहाँ के प्रमुख दुकानदारों, व्यापारियों और कम्पनी प्रतिनिधियों से बात की।

उनकी मिलीजुली राय में सरकार के कर छूट के प्रावधान का स्वागत किया गया, वहीं स्टेशनरी दुकानों पर उत्साह देखने को नहीं मिला। बैंक की कतार में लोगों को कर छूट के रिफंड को लेकर इंतजार करते भी देखा गया। फिर भी कहा जा सकता है कि बाकू शॉपिंग फेस्टीवल अपने दूसरे सप्ताह तक आते आते काफी परवान चढ़ गया है। देश में इस समय बहार का मौसम है और उत्तरी ठंडे भागों से भी लोग आसानी से बाकू पहुँचकर ज़रूरत और आराम का सामान ख़रीद लेना चाहते हैं।

मेले में लीजिए एक्सट्रा लाभ- नारमिन सलायेवा

अज़ैरबाइजान की लग्जरी आइटम की बड़ी रिटेल चैन सिन्टेक्स की जनसम्पर्क अधिकारी नारमिन सलायेवा मानती हैं कि बाकू शॉपिंग फेस्टीवल के दौरान ग्राहकों को दोहरा लाभ मिलता है। साल 1994 से शुरू हुई उनकी कम्पनी का देश में बड़ा कारोबार है। वह कहती हैं कि हमारे यहाँ दाम तुर्की और अरब से भी कम हैं। आपको यह चीज़ हमारे दामों में नज़र आ जाएगी और दुबई, दोहा और इंस्ताम्बुल के मुक़ाबले हमारे यहाँ दाम काफी कम हैं।

 

इसके अलावा आपको बाकू में अच्छा माल और वेराइटी भी देखने को मिलेगी। बाकू शॉपिंग फेस्टीवल के दौरान ग्राहक और दुकानदार दोनों के लिए अच्छा अवसर होता है। ग्राहकों को कई बार 30% तक लाभ मिल जाता है और अधिक बिक्री से सप्लाई बढ़ जाती है और उद्यमी को भी लाभ होता है। अपने प्रतिद्वन्द्वियों के मुक़ाबले देखें तो बाकू के दाम बहुत कम हैं। आपको कर में छूट और दुकान से मिलने वाली छूट दोनों का फ़ायदा मिलता है। इस तरह के मेलों से शहर एक पर्टयक स्थल के रूप में उभरेगा और हमारी होटलें और रेस्त्राँ भी सस्ते हैं।

उद्यमियों को मेले से फ़ायदा- फ़रीद रसूलोव

बाकू शॉपिंग फेस्टीवल से उद्यमियों को लाभ मिलता है। इस तरह के प्रयास से नई कम्पनियों को उभरने और विकास करने में मदद मिलती है। फ़रीद रसूलोव बताते हैं कि उनकी बाकू शहर में दो दुकानें हैं और उन्हें व्यापार मेले के दौरान छूट का लाभ मिल रहा है। फेस्टीवल को वह ग्राहक और उद्यमी दोनों के लिए लाभप्रद मानते हैं। फ़रीद रसूलोव ने अज़ैरबाइजान के कारपेट अजायबघर में एक ऐसे घर की परिकल्पना पेश की जहाँ हर चीज़ कारपेट की बनी हुई है।

इसके बारे में वह बताते हैं कि उन्होंने नख़शिवान (अज़ैरबाइजान का तुर्की से लगता सरहदी राज्य) की कला के संयोजन के लिए यह प्रयास किया था। बाद में इससे मिली प्रशंसा से प्रभावित होकर उन्होंने अपना कारोबार नख़शिवान के एक गाँव ‘चेलेबी’ के नाम से शुरू किया। साल 2013 से शुरु किए गए चेलेबी के कारोबार में काफ़ी प्रगति है। वह नवीन जीवनशैली से जुड़े आर्टिफेक्ट बनाते हैं। फ़रीद रसूलोव का कहना है कि वह मात्र समाज में मौजूद कलाओं का संयोजन कर रहे हैं। मात्र चार ही वर्ष में उनका ब्रांड काफ़ी स्थापित हो गया है। पेशे से डॉक्टर फ़रीद रसूलोव नवीन अज़ैरबाइजानी कला के संवाहक के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

अज़ैरबाइजान सरकार का शुक्रिया- इलकिन क़सीमोव

अज़ैरबाइजान की बड़ी इलेक्ट्रॉनिक चैन के महाप्रबंधक इलकिन क़सीमोव कहते हैं कि वह बाकू शॉपिंग फ़ेस्टीवल का हिस्सा बनकर काफ़ी प्रसन्न हैं। उनकी कम्पनी इस मेले में दूसरी बार प्रतिभागी बन रही है। उनकी कम्पनी के देश में 11 स्टोर हैं जिसमें से 8 बाकू शहर में हैं। वह बताते हैं कि दरअसल छूट का 10.20% तक लाभ ग्राहकों को जाता है। वह मेले में लाभांश घटने को रोना नहीं रोते बल्कि कहते हैं कि बिक्री बढ़ने से बल्कि हमारा लाभ बढ़ जाता है।

 

भारी इलेक्ट्रिकल आइटम के सिर्फ़ घरेलू ग्राहकों तक पहुँच को वह स्वीकार करते हैं लेकिन मानते हैं कि हल्के और सस्ते स्मार्ट फ़ोन के लिए वह विदेशी ग्राहक मेले का लाभ लेने के लिए पहुँचेंगे। साल 2015 में अज़ैरबाइजान की मुद्रा का दुगुना अवमूल्यन हो गया था, इसका लेकिन लाभ यह हुआ कि देसी बाज़ार में विदेशी सैलानी आने लगे क्योंकि एक डॉलर में पहले जितने अज़ैरबाइजानी मनात आते थे, अब उसके दुगुने मिल जाते हैं। वह भारत, चीन और रूस के इलेक्ट्रॉनिक ग्राहकों के अज़ैरबाइजान आने पर शंका जताते हैं क्योंकि वह अपने ही देश में बेहतर सामान बना रहे हैं। क़सीमोव की राय में वह बेहतर सैलानी हो सकते हैं। बाकू शॉपिंग फ़ेस्टीवल में बैंकों पर रिफंड के लिए जमा लोगों के लिए वह और बैंक प्वाइंट की माँग करते हैं।

युवाओं में जोश नहीं- कुलसूम मुहम्मदोवा

पुराने ’28 मई’ के नाम से चल रहे मॉल में ‘ग्राफ़िका’ नाम के स्टोर के मैनेजर कुलसून मुहम्मदोवा को लगता है कि बाकू शॉपिंग फ़ेस्टीवल का युवा ख़ासकर किशोर और बच्चों में जोश नहीं है क्योंकि एक तो टैक्स में छूट का पैसा वापस लेने की प्रक्रिया काफ़ी जटिल है। फिर कर छूट का पैसा आपको उसी दिन लेना होता है। दूसरा कम से कम 100 अज़ैरबाइजानी मनात (भारतीय रुपए तक़रीबन 3800) की शर्त के कारण बच्चे इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कुलसूम मानती हैं कि बच्चों की क्षमता 100 मनात ख़र्च करने की नहीं है। साल 1988 में शुरू हुई इस पुरानी दुकान में ज़्यादातर बच्चे, किशोर और विद्यार्थी ही ख़रीदारी के लिए आते हैं।