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क्या हैं ? CM योगी के बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार से ‘अच्छा है आप लोग पत्थर ही बेचो’ कहने के मायने

हसन राणा

पीएसी दिवस के मौके पर आयोजित एक समारोह में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत, वहां एग्जीबिशन में एक मुस्लिम व्यक्ति का स्टाल लगा था, मुआयना करते हुए मुख्यमंत्री उस स्टाल तक भी पहुंचे, वो व्यक्ति उत्साहित होकर मुख्यमंत्री योगी को पत्थरो की विशेषता बताने ही वाला था, कि मुख्यमंत्री ने चलते हुए खुद ही स्टाल पर रखे हुए पत्थरो को बे परवाई से देखा, हाथ लगाया, और अहंकार व नफरत मिश्रित लहजे में कहा, अच्छा है आप लोग पत्थर ही बेचो

जिन लोगो ने योगी आदित्यनाथ के भाषण सुने हैं, इसपर उन्हें तो कम से कम हैरानी नही होनी चाहिए, बहुत से लोगो को मुसलमानो से नफरत है, और वो शीर्ष पदों तक भी पहुंचे, मगर उन्होंने अपनी नफरत की वो आग मुसलमानो को नैतिक तरीके से नुक़सान पहुंचाकर बुझाई। और मुसलमान योगी आदित्यनाथ से भी नुक़सान और नफरत के सिवा कोई उम्मीद नही रखते, लेकिन मुख्यमंत्री की ये कुर्सी ज़रूर कुछ तमीज़ व तहज़ीब की उम्मदीवार है।

देश के मौजूदा हालात ऐसे हैं, कि भारत के बहुसंख्यक समुदाय के वो युवा जो सियासी महत्वाकांक्षा रखते हैं, और जल्द लोकप्रिय होना चाहते हैं, वो एंटी मुस्लिम छवि बना लेते हैं, और पिछले कुछ वर्षों से ये प्रयोग पूरी तरह कामयाब रहा है, योगी आदित्यनाथ भी इसी तर्ज ए सियासत की उपज हैं, ये बात तो स्पष्ट है कि हिन्दू समुदाय में लोकप्रियता का पैमाना मुसलमानो से नफरत बन चुका है।

ऐसा तो नही है कि पूरे हिन्दू समाज की ऐसी ही मानसिकता है, लेकिन ऐसे लोगो की बहुत बड़ी तादाद है जो अगर मुसलमानो से नफरत नही करते तो कम से कम उन्हें काबू में ज़रूर रखना चाहते हैं। और मुसलमानो को काबू करने के लिए ऐसे लोगो को वैधता देना मजबूरी है। और शम्भू जैसे बर्बर हत्यारे उसी मजबूरी की जाएज़ पैदाइश हैं।

हमारा मिज़ाज है कि हम किसी भी मुद्दे पर फौरी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हैं, किसी भी घटना पर गुस्से में गाली गलौच करना और फिर सब भुलभाल कर ऐसे शांत बैठ जाना जैसे कुछ हुआ ही न था, इस तर्ज़ ए अमल से हमे सबसे बड़ा नुकसान ये पहुंचा कि हमने सोचना छोड़ दिया, यही कारण है कि मुस्लिम युवाओं की फेसबुक प्रोफाईल पर अधिकतर बीजेपी और आरएसएस के वैचारिक खण्डन के बजाए उनके ऊपर ला हासिल और बे मायने व्यंग्यों से अटी रहती हैं।

 (लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं ये उनके निजी विचार हैं)

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