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AMU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष बोले, ‘अगर मन्ना वानी आतंकी है तो फिर वह है कहां ? सुरक्षा ऐजंसियां उसे ढ़ूंढ़ क्यों नहीं पाईं?’

अलीगढ़ – अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ फैजुल हसने ने संदिग्ध मन्नान वानी को लेकर सवाल किये हैं। उन्होंने कहा कि मैं हिदुस्तान का एक नागरिक औऱ AMU का छात्र होने के नाते मेरा फ़र्ज़ है कि सरकार औऱ प्रशासन से सवाल करना। फैजुल ने कहा कि मैं बस इतना जानना चाहता हूं कि मन्नान वानी के आतंकवादी होने की कोई पुख्ता सबूत है? या फ़ेसबुक पर सिर्फ फोटोशॉप से बनायी हुई फोटो से किसी के चरित्र में एक दाग लगा देना मात्र है।

उन्होंने कहा कि मैं इसलिए सवाल कर रहा हूं कि अगर वह गलत नहीं है तो उसके जैसे होनहार छात्र के साथ ऐसा करना हिंदुस्तान के विकास में बट्टा लग देगा। फैजुल ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि हमारे देश की इतनी बड़ी-बड़ी जांच एजेंसियां जैसे IB, NIA, RAW और ATS होने के बावजूद मन्नान का अभी तक सुराग क्यों नहीं मिल रहा है? मन्नान का आखिरी लोकेशन चार जनवरी को दिल्ली में थी और उसके फ़ेसबुक एकाउंट का डिएक्टिवेट होना शक़ के घेरे में है।

फैजुल ने कहा कि यह मामला मेरे इदारे की इज़्ज़त से जुड़ा है इसलिए उसका मिलना बहुत ज़रूरी है। मैं सरकार और प्रशासन के साथ हमेशा खड़ा हूं लेकिन उसके बारे में कोई ठोस सबूत होना बहुत ज़रूरी है जिससे उसका आतंकी संगठन से जुड़ा होना दिखता हो। अगर वह पाकिस्तान में है जैसा आतंकी सलाहुद्दीन का बयान दिखाया जा रहा है तो उसकी सच्चाई क्या है? अगर उसके पास मन्नान है तो उसने वीडियो में दिखाया क्यों नहीं ?

उन्होंने मन्ना को लेकर सवाल करते हुए कहा कि अगर वह सच में पाकिस्तान पहुंच गया तो सबसे बड़ा सवाल देश की बड़ी जांच एजेंसियों पर करता हूँ कि वह पाकिस्तान कैसे चला गया जबकि हर एक मोड़ पर CCTV कैमरे और चेकप्वाइंट है। वह ट्रेन से गया तो रेलवे स्टेशन पर और अगर प्लेन से गया तो एयरपोर्ट पर या बस से गया तो बस स्टैंड पर कोई न कोई रिकॉर्ड तो ज़रूर होगा? लेकिन मैं तबतक उसे आतंकवादी नही मानूंगा जबतक हमारे देश की बड़ी जांच एजेंसियों से कन्फर्म नही हो जाता और वह कोई ठोस सबूत के साथ न पेश करेंगे।

फैजुल हसन ने कहा कि 17 साल पहले यही इलज़ाम मेरे इदारे पर लगा था कि गुलज़ार वानी (अरबिक में पीएचडी) और सय्यद मो मोबीन (MBBS) कर रहे थे उनको आतंकी संगठन जुड़े होने के शक़ में उठा लिया था और फिर पिछले साल उनको बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया क्योंकि सरकार के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। न किसी जांच एजेंसी ने, न सरकार ने, न अफसर ने उनसे माफ़ी मांगी और न ही उनकी ज़िंदगी पर लगे इलज़ाम को धोने के लिए कोई ठोस कदम उठाया। न पैसे दिए, न नौकरी दी। फैजुल ने कहा कि मैं इस मामले में बहुत सरकार से अपील करता हूँ कि वह बहुत बारीकी से जांच करवाएं जिससे सच का पता चल सके।

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