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नज़रियाः लालू यादव फीनिक्स पक्षी हैं, जो अपनी राख से जी उठता है.

दिलीप मंडल

लालू यादव ने 15 साल बिहार पर शासन किया. उससे पहले भी सांसद रहे. इन 15 साल के बाद, पांच साल रेल मंत्री रहने के दौरान केंद्र में लगभग नंबर-2 की पोजिशन रही. बाद में दो साल और उनकी पार्टी ने बिहार में सरकार चलाई. अभी भी बिहार में वोट प्रतिशत और एमएलए की संख्या के हिसाब से आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है. लालू देश के अकेले नेता हैंं जो देश में कहीं भी बोलने के लिए खड़े हो जाएं, तो हजारों की भीड़ जमा हो जाती है.

पिछले 27 साल में 22 साल सत्ता में रहने का चमत्कार भारतीय राजनीति के किसी भी नेता ने नहीं दिखाया है. किसी ने भी नहीं. और वह भी सबसे बुरी स्थितियों में. जब अफसरशाही, मीडिया, न्यायपालिका सब प्रतिकूल है, तब लालू ने राज किया है. करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया है.

कुछ तो बात है बंदे में. और हां, यह सिर्फ 10 प्रतिशत यादव वोट की वजह से नहीं है. लालू की लोकप्रियता को समझ पाना कोई आसान काम नहीं है. लालू के बारे में हमेशा लगता है कि मर गया. राख बन गया. लेकिन लालू अपनी ही राख से जी उठने वाला फीनिक्स पक्षी है. वह मरकर भी नहीं मरता.

(लेखक इंडिया टुडे मैग्जीन के पूर्व संपादक हैं)

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