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शख्सियत

आबिद हसन सफ़रानीः जिन्होंने ‘जय हिन्द’ के नारे के साथ साथ सुभाष चंद्र बोस को ‘नेता जी’ का लक़ब दिया।

वसीम अकरम त्यागी आज 23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस को ‘नेता जी’ का नाम आबिद हसन सफ़रानी ने दिया। आबिद हसन सफ़रानी वही शख्सियत थे जिन्होंने जय हिन्द का नारा दिया। आजाद हिन्द …

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जन्मदिन विशेषः अहिंसा के बादशाह सरहदी गांधी उर्फ बाचा खान, वह शख्सियत जिन्हें ‘बाहरी’ होकर मिला था भारत रत्न

महेन्द्र दुबे तलवार और ख़ंजर से जंग जीतने वाले बादशाहों से जुदा एक बादशाह, ऐसा भी हुआ है जिसने अहिंसा के हौदे पर सवार होकर लोगों के दिलो की जमीन पर अपनी बादशाहत कायम की थी! ताउम्र भारत पाक तकसीम की मोखालाफ़त करने वाले इस छह फीट लंबे बादशाह का …

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रवीश का लेखः औरंगज़ेब जिसने आखिरी वक्त में कहा था ‘मैं अजनबी की तरह आया और अजनबी की तरह जा रहा हूं।’

रवीश कुमार औरंगज़ेब और आरक्षण। इससे ज़्यादा लिखने की कोई ज़रूरत नहीं है। इन दो शब्दों को देखते ही पढ़ने वाले के दिमाग़ में जो भ्रांतियां मौजूद हैं वो बाहर आने लगती हैं। लोगों के मन में भ्रांतियों के अलावा कई जानकारियां भी सही हैं मगर उसके अलावा कुछ नया …

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इब्राहीम गार्दीः मराठों का वह जांबाज सेनापति जो पीठ दिखाकर नहीं भागा बल्कि मुक़ाबला करते हुए शहीद हुआ

नज़ीर मलिक पेशवाई इतिहास में बाजीराव प्रथम ही एक मात्र पेशवा थे जो वीर धीर और साहसी थे, मगर वे शिवाजी की तरह सम्मानित नहीं हो सके। हालांकि उनकी विजय यात्रा शिवाजी से कहीं बड़ी थी। मगर उनकी नस्ली श्रेष्ठता का दंभ ही उनकी महानता की राह की सबसे बडी …

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यादों में सफदरः मियां किस-किस को रोकोगे हमारा ज़िक्र करने से, हमारे ख़ून की लाली झलकती है फ़जाओं में

फ़ानी जोधपुरी जब भी दलील के साथ उठने वाली आवाज़ को डराया-धमकाया जाए तो सफ़दर हाशमी जैसी शख़्सियत की ज़रूरत महसूस की जाने लगती है। सफ़दर हाशमी ऐसी शख़्सियत थे जिनको सच कहने पे मौत मिली,सफ़दर हाशमी एक पैदाइशी ड्रामाअदाकार (रंगकर्मी) थे। 12 अप्रेल 1954 में सफ़दर हाशमी दिल्ली में …

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यादों में अनवर : ‘वो कहते हैं ये जिंदगी कुछ नहीं, कि उनके लिये मौत भी कुछ नहीं’

मोहम्मद नज्मुल क़मर अनवर जलालपुरी का नाम ज़बान पर आते ही नौजवानों से लेकर बुज़ुर्गों के ज़हन में एक शख्सियत उभर कर आती है, हर दिल अज़ीज़ नाज़िम ए मुशायरा की और एक मारूफ शायर की। और आवाज़ गूंजती है वाह वाह, बहुत ख़ूब। अनवर जलालपुरी की पैदाइश 6 जुलाई …

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जन्मदिन विशेषः  भगतसिंह के भारत में ही जन्मे सफ़दर हाशमी जैसे क्रांतिकारी को आप भूल तो नहीं गए?

राशिद यूसूफ जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीयों पर जुल्म की इंतेहा कर दी थी तभी भगतसिंह, चंद्र शेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ुल्ला खां और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे हजारों क्रांतिकारीयो ने अपने जीवन का बलिदान देकर हमें उस गुलामी और जुल्म से आज़ादी दिलाई, इन क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा इतिहास के …

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चंद्रास्वामीः जिन्हें भारत के प्रधानमंत्री से मिलने के लिये पहले से अप्वाइंटमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ी.

नितिन ठाकुर विवादित तांत्रिक चंद्रावस्वामी के बारे में कहा जाता है कि जब भारत के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे तब उन्हें उनके पांच साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री से मिलने के लिये अप्वाइंटमेंट लेने की जरूरत नहीं पडती। उन्हें भारत के प्रधानमंत्री रहे नरसिम्हा राव का सबसे करीबी सलाहकार …

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ओमर मुख्तारः काश कि मुसलमान साम्राज्यवाद से लड़ने वाले इस क्रान्तिकारी में अपना नायक तलाश करते

नज़ीर मलिक मुसलमानों आप अल्लाह व आखिरी रसूल को यकीनन जानते हो। आप ईसा, मूसा, इब्रहीम वगैरह सभी अलेहिसस्लाम को जानते हो। आप तो हिटलर, मुसोलिनी और गोलवलकर को भी जानते हो। यहीं नही आप अपने एक घोषित दुश्मन (?) कम्यूनिस्ट और उसके एक अजीम योद्धा चे ग्वेरा को भी …

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मौलाना मज़हरूल हक़ः जिनके इंतेकाल को गांधी जी ने हिन्दू मुस्लिम एकता के स्तंभ का गिर जाना बताया था

मोहम्मद उमर अशरफ अपने अख़बार ‘दी मदरलैंड’ में सरकार के ख़िलाफ़ लिखने के अभियोग में 26 जुलाई 1922 को मौलाना मज़हरुल हक़ गिरफ़्तार कर लिए गए, उन पर इस अभियोग में धारा -500 व 501 के तहत 1000 रु का जुर्माना या 3 महीने क़ैद की सज़ा सुनाई गई। हक़ …

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