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गोरखपुर, फूलपुर में BJP को मिली करारी शिकस्त पर भाजपा ने मांगा CM योगी से इस्तीफा

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लखनऊ भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव में भाजपा चुनाव हार गई है, और इसी महीने की 19 तारीख को सूबे में योगी सरकार का एक साल पूरा हो रहा है. उधर केंद्र में मोदी सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी को मिली हार एक सबक है. अगर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ना की जाती तो शायद यह हार नहीं होती. पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि वह आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करे, उनकी सुने और वर्तमान नेतृत्व में उनके कामकाज की समीक्षा की जाए.

प्रदेश भाजपा के अंत्योदय प्रकोष्ठ के सहसंयोजक रहे पार्टी नेता संजय तिवारी का कहना है कि यह हार बहुत ही दुखद है. पार्टी कार्यकर्ता खून पसीना बहाने वाले हैं और उनके साथ बुरा हुआ है. दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कार्यकर्ताओं के प्रति पार्टी नेतृत्व उदासीन है. कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है जिसकी वजह से यह हार मिली है.

उन्होंने कहा कि हम लोग अपने नेतृत्व से उम्मीद करते हैं कि इन चुनाव परिणामों से सबक लेते हुए आगे से कार्यकर्ताओं के प्रति प्रेम रखा जाए. जो बाहर से पार्टी में आते हैं और गाली देते हैं, जो विचारधारा और हिंदुओं को गाली देते ,हैं ऐसे लोग जो हमारे मंच को सुशोभित करते हैं उनसे दूर रहा जाए.

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देखकर पार्टी कार्यकर्ता कुंठित हो रहे हैं और समाज में इसका बहुत ही गलत संदेश जाता है. ऐसी स्थिति में पार्टी को अपने इन क्रियाकलापों पर विचार करना होगा, जिससे हम दोबारा पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में सत्ता संभाले और मोदी जी फिर प्रधानमंत्री बनें और देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो.

सीएम योगी हैं इस हार जिम्मेदार

संजय तिवारी ने कहा कि गोरखपुर की हार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेनी चाहिए. यह कार्यकर्ताओं की अपेक्षा है. इसके अलावा संगठन में बैठे कुछ लोग तानाशाही के साथ शासन चला रहे हैं, उनको भी आत्ममंथन करना चाहिए.जब मुख्यमंत्री घर के मुखिया हैं तो घर मे कोई गड़बड़ी होती है उसकी जिम्मेदारी भी उनकी होती है.

संजय तिवारी ने आगे कहा कि चुनाव परिणाम जो आया है इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की बनती है .कफन चोर पुलिस को साधु की संज्ञा देने वाले मुख्यमंत्री है. आज उसी का परिणाम है कि चुनाव में हार हुई है. सीधे तौर पर मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं और उनको नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की पेशकश करनी चाहिए.