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ईरानः खामनेई बोले ‘हम अमेरिका से नहीं डरते, इस्लाम की जंग इस्लाम के दुश्मनों से है और यह जारी रहेगी।’

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तेहरान – इस्लामी क्रांति के सीनियर नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि एक बार फिर ईरानी जनता ने पूरी ताकत के साथ अमरीका और ब्रिटेन को मुंह तोड़ जवाब दिया है और उन्हें साफ संदेश दे दिया है कि इस बार भी तुम कुछ नहीं कर सके और आगे भी कुछ नहीं कर सकोगे।

क़ुम के हज़ारों लोगों ने 9 जनवरी 1978 में क़ुम की जनता के क्रांतिकारी आंदोलन की वर्षगांठ के मौके पर मंगलवार को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की थी। इस मौके पर खामनेई ने कहा कि इस्लामी क्रांति ने ईरान में दुश्मनों की जड़ें काट कर फेंक दी इसीलिए दुश्मन लगातार क्रांति से बदला लेने का प्रयास करता है और हर बार उसको नाकामी का मुंह देखना पड़ता है और ईरानी जनता के प्रतिरोध और संघर्ष से वह आगे भी कुछ नहीं कर सकेगा।

खामनेई ने इस्लामी व्यवस्था और क्रांति के मूल्यों के समर्थन में पिछले कुछ दिनों के दौरान ईरानी जनता द्वार निकाली गई भव्य रैलियों की तरफ संकेत करते हुए कहा कि ईरानी जनता ने इस बार भी अमरीका, ब्रिटेन और लंदन में बैठे हुए तत्वों को पूरी ताकत के साथ मुंह तोड़ जवाब दिया और यह संदेश दे दिया कि इस बार भी तुम कुछ नहीं कर सकोगे।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि दुश्मन की साजिशों के मुक़ाबले में ईरानी जनता की तरफ से इस प्रकार की निकाली गई व्यवस्थित, तत्वदर्शी और भव्य रैलियों का दुनिया में कहीं भी उदाहरण नहीं मिलता और ईरानी जनता की इस प्रकार की भव्य रैलियों का क्रम पिछले चालीस वर्षों से जारी है।

उन्होंने कहा कि यह एक साल, दो साल और पांच साल की बात नहीं है बल्कि ईरान की जनता की लड़ाई ईरानी राष्ट्र के दुश्मनों से है, ईरान की जंग, ईरान के विरोधियों से है, इस्लाम का युद्ध इस्लाम के दुश्मनों से है और यह क्रम जारी है। उन्होंने पिछले दिनों कुछ शहरों में जनता की वैध मांगों को लेकर किए गए प्रदर्शनों और बाद में इन प्रदर्शनों में कुछ अराजक तत्वों के शामिल हो जाने और उपद्रवी कार्यवाही अंजाम दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की क़ानूनी और वैध मांगों में, और हंगामे तथा पवित्र स्थालों का अनादर करने वालों की कार्यवाहियों में अंतर है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी वैध मांगों को लेकर प्रदर्शन करें , रैलियां करें, इसमें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता किन्तु कुछ लोग इन प्रदर्शनों से ग़लत लाभ उठाकर पवित्र स्थलों का अनादर करें, राष्ट्रीय ध्वज को आग लगाएं, मस्जिदों को नुक़सान पहुंचाएं, यह अलग विषय है और दोनों को आपस में नहीं मिलाया जा सकता और अपनी वैध मांगों के संबंध में प्रदर्शन करने वालों ने भी तुरंत स्वयं को इन तत्वों से अलग कर दिया।

उन्होंने कहा कि इन हंगामों के पीछे एक त्रिकोण लिप्त है। उन्होंने कहा कि अमरीका, ज़ायोनी शासन, फ़ार्स की खाड़ी के आसपास की एक मालदार सरकार और आतंकवादी गुट एमकेओ ने इन हंगामों की योजना तैयार की और इस का सारा ख़र्चा इसी मालदार सरकार ने ही उठाया क्योंकि जब तक यह सरकारें हैं अमरीका पैसे ख़र्च नहीं कर सकता।

उन्होंने ईरान से अमरीकी अधिकारियों की दुश्मनी और अप्रसन्नता का उल्लेख करते हुए कहा कि अमरीका, ईरानी जनता और सरकार से इसके लिए बहुत अधिक नाराज़ है कि उसको इस्लामी क्रांति और ईरानी जनता से पराजय हुई है। उन्होंने ईरान की इस्लामी व्यवस्था को जनव्यवस्था क़रार देते हुए कहा कि ईरान की सरकार अपनी जनता पर ही भरोसा करती है क्योंकि यह सरकार ईरानी जनता की अपनी निर्वाचित और बनाई हुई सरकार है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अमरीकी अधिकारियों के इस प्रकार के बयान को निर्लज्जता बताते हुए कि जिनमें वह कहते हैं कि ईरान, अमरीका की शक्ति से डरता है, कहा कि यदि तुमसे डरते तो 1970 के दशक के अंत में हमने तुम्हें ईरान से कैसे निकाल दिया और अभी कुछ सालों में तुम्हें पूरे क्षेत्र से कैसे निकाल दिया?