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नज़रियाः सच बोलने वालों को डरा रही है सरकार, डरा कर शासन कितने दिन चलेगा!

अरुण माहेश्वरी

डरा कर शासन कितने दिन चलेगा !

खबर थी कि ‘ट्रिब्यून’ अखबार में आधार के डाटा लीक होने की खबर देने वाली पत्रकार पर मोदी सरकार ने एफआईआर दायर की है। अब रविशंकर प्रसाद ने ख़ुलासा किया है कि किसी पत्रकार के खिलाफ नहीं, जो एफ़आईएआर दायर हुई है वह ‘अज्ञात व्यक्ति’ के नाम है ।

सवाल उठता है कि पूरे मामले की सच्चाई की सही ढंग से जाँच करने के बजाय मोदी सरकार सूचना देने वालों के खिलाफ अपराधी कार्रवाई करने की उतावली में क्यों है ? यह सवाल तब और भी प्रासंगिक हो जाता है जब किसी खास व्यक्ति के बजाय अज्ञात व्यक्ति के नाम एफआईआर दायर कराई जाती है, जब कि इस खबर को देने और प्रकाशित करने वाला व्यक्ति और अखबार दोनों ही अज्ञात नहीं है।

यह किसी भी आततायी शासक का जनता को डरा कर रखने का बहुत ही आज़माया हुआ नुस्ख़ा है । इसमें संकेतों के जरिये आम लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि ख़बरदार, सरकार के किसी भी कदम के नकारात्मक पक्ष को अगर उजागर करने की कोशिश करोगे तो तुम्हें दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

ट्रिब्यून के मामले में दो अज्ञात आदमी के नाम कार्रवाई वैसी ही एक नमूना कार्रवाई है, जो प्रेस को धमकाने की नीयत से की गई है । जैसे आतंकवादी विस्फोटों के जरिये लोगों को डराते हैं, वैसे ही अत्याचारी सरकारें भी झूठी कार्रवाइयों के जरिये लोगों को डराने का काम करती है । यह पूरे समाज को डरा कर बीमार बनाने का एक निंदनीय उपक्रम है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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