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विशेषः नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने पर क्या सोच रहे हैं यूपी के मुसलमान ? तो दाऊद भी BJP में आयेंगे?

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नई दिल्ली – वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने हाल ही में भाजपा में ‘घर वापसी’ कर ली है। नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने पर सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधकर सवाल किये जा रहे हैं कि मौकापरस्तों को समाजवादी पार्टी में जगह क्यों दी गईं और फिर क्यों उनके नवाजा गया। साथ ही यह भी सवाल किया जा रहा है कि जो लोग संकट के समय में पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं क्या सपा कल को अपने ‘अच्छे दिन’ आने पर दोबारा पार्टी में वापस लेगी। हमने सोशल मीडिया की ऐसी ही टिप्णियों को इकट्ठा किया है।

पूर्व राज्य सभा सांसद और नई दुनिया उर्दू साप्ताहिक के संपादक शाहिद सिद्दीकी कहते हैं कि समाजवाद केबड़े सेक्युलर नेता रातों रात भाजपा मैं शामिल हो गये। समाजवादी सरकार में इन्होंने दोनो हाथों से लूटा और राज्य सभा ना मिली तो एक दिन मैं मोदी भक्त हो गए। इन्हीं नरेश अग्रवाल के कहने पर राम गोपाल यादव ने मुझे बिलावजह पार्टी से बाहर निकला था , मैं ने उस वक्त भी इनकी भाजपाई मानसिकता का पर्दाफ़ाश किया था। क्या अखलेश यादव ने कोई सबक़ सीखा और समाजवाद के हकिकी दोस्तों की पहचान की ?


जमीयत उलमा हिन्द यूपी के मुजफ्फरनगर के मीडिया प्रभारी मौलाना मोहम्मद मूसा कासमी कहते हैं कि सपा ने और अखिलेश यादव ने एमएलसी और राज्यसभा मेंबर भाजपा वालो को ही बनाया,जो बनने के बाद सीधे भाजपा में चले गए। इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले,ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले।

स्कूल टीचर नदीम अख़्तर सवाल उठाते हैं कि यह कोई सवाल ही नही कि कितने समाजवादी भाजपा मे गये? सवाल यह कि समाजवादियों मे कितने भाजपाई हैं? उससे भी बड़ा सवाल क्या समाजवादियों मे कोई समाजवादी है? वकील और टिप्पणीकार सरफराज मलिक कहते हैं कि नरेश अग्रवाल जैसे सपाई हो या किसी सो काल्ड सेक्यूलर दल का हिन्दू लीडरशिप, उनके भाजपा ज्वाइन करने से मुझे न पहले तकलीफ थी न आज है और न भविष्य में होगी।

मेरी चिंता इस तरह के सभी नेताओ की जय जय कार करने वाली मुस्लिम अवाम के लिए है जो एक झटके में खुद को ठगा महसूस करते हैं, “भइया जी” अथवा “नेता जी” मर जाएंगे लेकिन भाजपा में नहीं जाएंगे, तक जैसे स्लोगन इस्तेमाल करने वाली मुस्लिम अवाम किसके पास जाए? किधर जाए? अपनी ही बिरादरी के नेता से बग़ावत कर पार्टी निष्ठा और भइया जी पर अटूट विश्वास रखने वाली ये भीड़ हर दरवाजे से दुत्कारी जाएगी। किसी दूसरे सो काल्ड सेक्यूलर दल के दूसरे नेता का क्या भरोसा? कल को मौका पाते ही वो भी निकल लेगा।

समाजिक कार्यकर्ता और यूनाईटेड अगेंस्ट हेट अभियान के सद्स्य नदीम खान तंज करते हुए कहते हैं कि दाऊद इब्राहिम किसी भी दिन भाजपा में आ सकते है। केवल एक समस्या है दाऊद भारत आकर पार्टी की सदस्यता लेना चाहते है लेकिन अमित शाह उनको देश के बाहर से ही पार्टी में लेकर खाड़ी देशों का प्रभारी बनाना चाहते है।

पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने इस विषय पर युवा पत्रकार वसीम अकरम त्यागी की टिप्पणी को अपने फेसबुक वॉल पर शेयर किया है, इस टिप्पणी में लिखा है कि ‘गाय अगर माता है तो बताईये बछिया क्या है ? और बछड़े को क्या कहेंगे ? बैल को क्या कहेंगे ? ये वाणी किसी और की नहीं बल्कि थोड़ी देर पहले ही नये नये भाजपाई बने नरेश अग्रवाल ने ये बातें बीते साल राज्यसभा में कही थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘तेली’ कहकर संबोधित किया था।

अब ऐसे लोग भाजपा में आ गये हैं, क्या भाजपा वाशिंग मशीन है कि उसमें कितना ही दागदार क्यों न आ जाये उसे क्लीन कर देती है। हैरानी तो इस बात की है कि सपा ने समाजवाद के रथ पर उन लोगों को ढ़ोया है जो आडवाणी के ‘रथ’ पर सवारी करना चाहते हैं।


सपा ने कई भाजपाईयों को एमएलसी बनाया, राज्यसभा सांसद बनाया जिन्होंने मौका मिलते ही समाजवाद को लात मारकर अपनी गर्भभूमी में वापसी कर ली। सोचिये अखिलेश बाबू सच्चे समाजवादी आपके लिये लाठी खाते हैं, और झूठ मूठ के समाजवादी, नरेश अग्रवाल, सरोजनी अग्रवाल की तरह सत्ता की मलाई खाते हैं।