Home इंटरव्यू इंटरव्यूः ‘अमित शाह ने दिया था सीधे गोली मारने का आदेश’

इंटरव्यूः ‘अमित शाह ने दिया था सीधे गोली मारने का आदेश’

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2002 गुजरात दंगों पर लिखी गयी पत्रकार राणा अय्युब की किताब ‘गुजरात फाइल्स’ बेहद विवादित और चर्चित रही है। किताब में वीडियो, आॅडियो, स्टिंग और प्रमाणों के जरिए बताया गया है कि 2002 गुजरात दंगा सरकार प्रायोजित था। किताब में तथ्यों के साथ विस्तार से जिम्मेदार पुलिस और खुफिया अधिकारियों के हवाले से साबित किया गया है कि गुजरात दंगों के मुख्य संचालनकर्ता वर्तमान भाजपा अध्यक्ष और गुजरात के तत्कालीन मंत्री अमित शाह थे। पढ़िए, गुजरात फाइल्स के अध्याय 4 का एक महत्वपूर्ण अंश, जिसमें गुजरात के तत्कालीन पुलिस अधिकारी और आइपीएस राजन प्रियदर्शी सीधे—सीधे बता रहे हैं कि कैसे अमित शाह ने सीधे—सीधे गोली मारने का आदेश दिया था।

(आईपीएस अफसर राजन प्रियदर्शी से राणा अय्युब की बातचीत का अंश)

आपके मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तो यहां गुजरात में बहुत लोकप्रिय हैं?

हां, वह सबको मूर्ख बनाते हैं और लोग मूर्ख बनते हैं।

ऐसे हाल में तो, अतिरिक्त डीजी होने के नाते, आपके लिए उनके साथ काम करना कठिन होता होगा?

उनकी कभी हिम्मत नहीं हुई कि वे मुझे कोई भी गैरकानूनी काम करने के लिए मजबूर कर सकें।

यहां काफी अराजकता चलती है न? शायद ही कोई ऐसा अफसर हो जो खरा हो?

बहुत थोड़े से हैं। यह व्यक्ति नरेंद्र मोदी (पूरे राज्य में) मुसलमानों के कत्ल के लिए जिम्मेदार हैं।

अच्छा! मैंने सुना है कि पुलिस अधिकारी भी सरकार की ही नीति पर चलते रहे हैं?

हां, सारे के सारे, जैसे यह पीसी पांडे, सबकुछ उनकी मौजूदगी में हुआ।

ज्यादातर अफसरों का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है?

क्या गलत तरीके से! उन्होंने किया है तभी तो वे अब सलाखों के पीछे जा रहे हैं। उन्होंने एक जवान लड़की को मुठभेड़ में मार डाला।

वाकई?

हां, उन्होंने उसे लश्कर आतंकी कहा था। वह मुंबई से थी। कहानी यह गढ़ दी गई कि वह एक आतंकवादी थी, जो मोदी का कत्ल करने के लिए गुजरात आई थी।

और यह झूठ था?

हां, सरासर झूठ है।

और, जब से मैं यहां आयी हूं, सभी सोहराबुद्दीन मुठभेड़ के बारे में बात कर रहे हैं?

पूरा देश उस मुठभेड़ की बात कर रहा है। मंत्री के इशारे पर उन्होंने उस सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति को ठिकाने लगा दिया।

यह मंत्री अमित शाह, कभी मानवाधिकारों में यकीन नहीं करते थे। वह हमसे कहते थे कि मैं इन मानवाधिकार आयोग में यकीन नहीं करता हूं। और अब देखो, अदालतों ने उन्हें जमानत भी दे दी है।

तो, आपने कभी उनके अधीन काम नहीं किया?

किया था, जब मैं एटीएस प्रमुख था। उन्होंने वंजारा का ट्रांसफर किया और मुझे ले आए। और मैं तो वो व्यक्ति हूं जो मानवाधिकारों में यकीन करता हूं। तो शाह ने मुझे अपने बंगले पर बुलाया। मैं तो तब तक कभी किसी के बंगले पर गया नहीं था। न ही किसी के घर या दफ्तर पर। इसलिए मैंने उन्हें कह दिया कि, सर मैंने आपका बंगला देखा नहीं है। वह हैरान रह गए और पूछा, तुमने मेरा बंगला क्यों नहीं देखा है? आगे वह बोले, चलो ठीक है। मैं तुम्हारे लिए अपनी निजी गाड़ी भेज दूंगा, उसमें आ जाना। इस पर मैंने कहा, ठीक है, आप मेरे लिए अपनी गाड़ी भेज दीजिएगा। तो जब मैं पहुंचा तो उन्होंने कहा, ‘अच्छा आपने एक बंदे को अरेस्ट किया है ना, जो अभी आया है एटीएस में, उसको मार डालना है।”

मैंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की। और, उन्होंने फिर कहा, ‘देखो मार डालो, ऐसे आदमी को जीने का कोई हक नहीं है।’

(पत्रकार राना अय्युब की चर्चित पुस्तक ‘गुजरात फाइल्स’ के अध्याय 4 का एक अंश।)

(नोट – यह इंटरव्यू जनज्वार वेबसाईट  से सभार लिया गया है)