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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक और शर्मनाक बयान, कहा ‘गन्दे देशों से लोग अमरीका क्यों आते हैं?’

नई दिल्ली – अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बहुत शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने व्हाईट हाऊस की एक बैठक में सवाल किया कि गंदे देशों से लोग अमरीका क्यों आते हैं। उन्होंने बीते गुरुवार को सांसदों के साथ बैठक में अलसाल्वाडोर, हैटी और अफ़्रीक़ी देशों के पलायनकर्ताओं के बारे में बहुत ही अपमानजनक शब्द ‘शिटहोल’ का इस्तेमाल किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बैठक में मौजूद सांसद ट्रंप की इस बात को सुन कर चौंक  गए और उत्तेजित हो गए कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति एक नस्लभेदी व्यक्ति है। वाशिंग्टन पोस्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “हम गंदे देशों के लोगों को अपने यहां क्यों आने देते हैं? हमें हैटी के और नागरिकों की क्या ज़रूरत है? उन्हें निकाल बाहर करो?”

रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप ने सुझाव दिया कि अमरीका को यूरोपीय देशों के पलायनकर्ताओं को अधिक स्वीकार करना चाहिए जैसे नॉर्वे के पलायनकर्ताओं को कि जिसकी प्रधानमंत्री एर्ना सोल्बर्ग से बुधवार को ट्रंप ने व्हाईट हाउस में मुलाक़ात की। बाद में न्यूयॉर्क टाइम्ज़ ने भी ऐसे इस टिप्पणी को रिपोर्ट किया जिन्होंने ओवल ऑफ़िस में हुई इस असमान्य बातचीत को सीधे सुना।

वाशिंग्टन पोस्ट के मुताबिक, ट्रंप की इस टिप्पणी से बैठक में मौजूद रिपब्लिकन सिनेटर लिंडसे ग्राहम और टॉम कॉटन, डेमोक्रेट सिनेटर डिक डर्बिन और रिपब्लिकन रिप्रेज़ेन्टेटिव बॉब गुडलेट हैरत में पड़ गए। व्हाईट हाउस ने भी ट्रम्प द्वारा पूरे अफ़्रीक़ी महाद्वीप की घृणित भाषा में व्याख्या का इनकार नहीं किया बल्कि कहा कि राष्ट्रपति ऐसी अप्रवासी नीति का समर्थन करते हैं जिससे हमारे समाज को कुछ हासिल हो।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता राज शाह ने ट्रंप की नस्लभेदी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा, “वॉशिंग्टन के कुछ राजनेता विदेशों के अधिकार का समर्थन करते हैं जबकि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा अमरीकी जनता के अधिकार के लिए लड़ेंगे।” गौरतलब है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह विवादित बयान कोई नया नही है, बल्कि वे बीते दो साल से लगातार विवादित बयानों और टिप्पणियों के कारण चर्चा में बने रहे हैं।

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