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मोदी जी देश के अन्नदाता के पैरों से लहू टपक रहा है, इस दुर्दशा पर जुबां तो खोलियेः अमरेश मिश्रा

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नई दिल्ली – बीते सोमवार को महाराष्ट्र के नासिक से चालीस हजार किसान पैदल चलकर मुंबई पहुंचे और उन्होंने मुंबई स्थित महाराष्ट्र विधानसभा का घेराव किया। इस दौरान की किसानों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, वायरल हो रही इन तस्वीरों में कई किसानों के पैरों में जख्म हो गये हैं। और उनसे खून बह रहा है।

किसान क्रान्तिदल के अध्यक्ष अमरेश मिश्रा ने किसानों की इस दुर्दशा पर मोदी पर सरकार पर निशाना साधा है, उन्होंने कहा है कि इन किसानों के पैरों से बहते इस खून को भी देखिये मोदी जी क्या यह खून देश के अन्नदाता का नही है। अमरेश मिश्रा ने ये निशाना इसलिये भी साधा है क्योंकि जब किसान महाराष्ट्र विधानसभा का घेराव कर रहे थे उस वक्त प्रधानमंत्री मोदी बनारस में गंगा की सैर कर रहे थे।

अमरेश ने कहा कि विदेशी पूंजी और ‘यारा-पूंजीवाद (crony capitalism)’ से अमीर हुए पूनम महाजन जैसे लोग सुन लें…लम्पट-नव-धनाड्य वर्ग का काल हैं किसान। 200 किलोमीटर पैदल चल कर आये किसान हमारे ही पिता-माता-भाई-बहन-दोस्त समान हैं. इनके पैर लहूलुहान हैं. मुंबई में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई–मराठी-उत्तर भारतीय-दक्षिण भारतीय सारे शहरी इन किसानो की मदद कर रहे हैं. कोई पानी दे रहा है, कोई बिस्किट, कोई वड़ा-पाव.मुंबई की मशहूर डिब्बेवाली सेवा के कर्मचारी खाना तक पहुंचा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भाजपा की नेत्री पूनम महाजन, किसानो के एतिहासिक, ‘लॉन्ग मार्च’ के पीछे ‘अर्बन माओईस्ट’ यानी ‘शहरी माओवादियों’ का हाथ बता रही है. वैसे माओवादी या ‘माओईस्ट’ कहना अपने में कोई बुरी बात नही है. लेकिन पूनम महाजन ने किसानो को माओवादी, एक भद्दे- ‘डेरोगेटरी’ अंदाज़ में कहा. पूनम महाजन जैसे लोग, माओवादियों को ‘अपराधी’ इत्यादी की संज्ञा में लाती हैं.

पूनम महाजन और उनका पूरा क्लास या वर्ग, खुद अपराधी-नव-धनाड्य, लुच्चे-लफंगे-लम्पट ‘बैकग्राउंड’ या परिवेश से आते हैं. इनकी हिम्मत देखो. गरीब किसानो को ‘अपराधी’ कह रही हैं। जहां लाल झण्डा देखा, वहां माऔवादी कह दिया। पूनम जैसे लम्पट-नव-धनाड्य का काल हैं किसान. इनको गाली देकर इस पूरे वर्ग ने अपने ताबूत में कील ठोक दी है.