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नज़रियाः सोचिये देश में कांग्रेस की सरकार होती, और कोई मुसलमान 25 हजार करोड़ लेकर विदेश भाग जाता तब क्या होता ?

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अब्बास पठान

कांग्रेस की सरकार होती और माल्या, मोदी, पूरी, अय्यर, चौकसी, कुमार, कोठारी, की जगह की अगर शाहरुख खान होते?  सोचिये यदि कोई “खान, अहमद, अंसारी” सरनेम तकरीबन 25000 करोड़ का चुना लगाकर विदेश भागे होते तो भक्तो का मामले के प्रति क्या नजरिया होता?

भक्तो ने अबतक शेषनाग को साइड करके धरती खुद के सर पे उठा ली होती… हाहाकार मच गया होता। देशद्रोही मुल्ला गद्दार जैसी बेशुमार गालिया फिज़ाओ में आंधियों की तरह तैर रही होती और उन गालीयुक्त गर्म हवाओ के थपेड़े देश के प्रत्येक अल्पसंख्यक मुसलमान के गाल पे पड़ रहे होते। उधर सोशल मिडीया पे ज्ञान अर्जित करके खुद को नास्तिक घोषित कर चूकी प्रजाति भी देशभक्ति के मोड पे आ गई होती।

अनुपम खेर अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ कही देशभक्ति की पुंगी बजा रहे होते… उधर गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी गला फाड़ फाड़ कर भक्तो से हूटिंग करवा रहे होते… शाहरुख़ इतने डर गये होते की उन्हें सोचना पड़ता की वापस मुल्क जाऊ या नही, जैसा जाकिर नाइक के साथ हुआ, उनका कोई गुनाह नही था लेकिन फिर भी उन्हें कुतर्क युक्त आरोप के चलते देश से बाहर जीवन यापन करना पड़ रहा है।

खैर दोगली देशभक्ति इन्सान को उसके सरनेम के आधार पे उपाधि देती है। यदि बेंक कर्ज़ लेकर विदेश जाने वाला “खान” है तो वो मुल्ला गद्दार देशद्रोही हुआ और वो यदि चौकसी मोदी कोठारी माल्या है तो दोगली देशभक्ति इतना कहकर पल्ला झाड़ लेगी की “”वो अय्याश है, चोर है, इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, वगेरह वगेरह वगेरह””

अगर कोई “वेमुला कन्हेया उमर” बगावत पे उतर जाए तो देशभक्ति के अंगारे इस कद्र फूटेंगे की कोई मृतक को देशद्रोही का सर्टिफिकेट दे रहा होगा तो कोई जुबान और गर्दन काटने के एवज में लाखो का इनाम घोषित कर रहा होगा। इन छात्रो को ये ताने के साथ याद दिलाया जाएगा की तुम भारत सरकार को टैक्स देने वाले लोगो की कमाई पे पढ़ रहे हो अपनी औकात में रहो। वही दूसरी तरफ केवल 44 कम्पनिया देश का 4.87 लाख करोड़ दबा कर बेठी हे उस विषय में कोई आवाज़ उठती नजर नही आएगी। आवाज छोड़िये चर्चा का चूँ तक नही निकलता। सरकारे घिरती है तो औरतो के बुर्खे में जाकर छुप जाती है।

वहीं कोई “गुज्जर जाट और पटेल” सरनेम वाले आंदोलन के नाम पे हजारो करोड़ का नुकसान कर दे चाहे औरतो को लूट फाड़ कर खेतो में भगा दे तो देशभक्ति को सांप सूंघ जाता है। कोई भी इन सरफिरो को गद्दार देशद्रोही की उपाधि नही देगा। ये उपाधि केवल एक समुदाय के लिए आरक्षित हे। बहरहाल शाहरुख़ खान की किस्मत अच्छी है की विजय माल्या वाली परिस्थति उनके साथ नही गुजरि।

शाहरुख़ 2014 में विश्वस्तर पे 33 नम्बर के दान दाता रहे है।उन्होंने कश्मीरी पंडितो की भी सहायता की है। भारत के टॉप 5 कर दाताओ में उनका नाम है। फिर भी सरनेम के आधार पे देशद्रोही घोषित हुए पड़े है। उनकी फिल्म यूनिट पे पथराव किया जाता है। कोई भी विजय माल्या के किंगफिशर बियर बार पे हमला नही करेगा। मामला वतन का हे ही नही। मामला तो सरनेम का है।

सारा सियापा “सरनेम” का है तभी तो अमर जवान ज्योति तोड़ने पे 50 लाख का जुर्माना रज़ा अकेडमी पे लगाया गया और अम्बेडकर की मूर्तियां तोड़ने पे मामूली धाराए लगाई गयी अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ। अखबार भी सरनेम देखकर ख़बर को कॉलम देता है, आप कभी ध्यान दीजिएगा। ताजा मामला आज का ही है, एक महिला को जिंदा जला दिया गया कहीं कोई खबर नही है क्योंकि सरनेम उसका वैसा उत्तम गुणवत्ता वाला नही था।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं, और ये उनके निजी विचार हैं)